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मेडिकल की पढ़ाई में काम आएगा मंगला का शरीर

Tue, 23 Jan 2018 12:03 AM IST
बाराबंकी
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देहदानी मृतका- मंगला देवी - फोटो : अमर उजाला
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मरने के बाद भी लोगों का हित सोचने वाले समाज के लिए मिसाल होते हैं। ऐसी ही एक और मिसाल मुबारक पुर गांव निवासी मंगला देवी बन चुकी हैं। इनकी मौत से दो लोगों नेत्रहीनों की अंधियारी जिंदगी में उजियारा होगा तो शरीर मेडिकल की पढ़ाई के काम आएगा। सोमवार को केजीएमयू के देहदान विभाग से आई टीम भारत के शरीर को लेकर लखनऊ रवाना हो गई। 
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विकास खंड हरख की ग्राम पंचायत मुबारक पुर गांव निवासी मंगला देवी (75) पत्नी स्वर्गीय भगवती प्रसाद ने 2 फरवरी 2014 को कोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लगे शिविर में देहदान के लिए आवेदन पत्र भरा था। जिनकी मौत सोमवार को हो गई।

मृतका के पुत्र ने इसकी सूचना भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और केजीएमसी के देहदान विभागाध्यक्ष डॉ. एसके पांडेय को दी। सूचना पर सीएचसी कोठी से पहुंचे चिकित्सक डॉक्टर नीरज ग्रोवर ने मृत्यु प्रमाण पत्र परिवारीजनों को सौंपा।
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केजीएमसी के देहदान विभागाध्यक्ष एसके पांडेय टीम में शेर बहादुर ,अनिल कुमार, अलीम के साथ पहुंचकर देहदानी का शव अपने साथ लखनऊ चले गए। उनके पुत्र जगजीवन का कहना है कि मां के द्वारा जो पुनीत कार्य किया गया है इसे निरंतर जारी रखा जाएगा।

इस मौके पर भाकियू के जिला उपाध्यक्ष लायकराम यादव, अनुपम वर्मा, सिद्धौर ब्लाक अध्यक्ष मुन्ना लाल धीमान, अयोध्या प्रसाद, राम मदन रावत सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

 सिद्धौर में देहदान का 11वां मामला : भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों द्वारा देहदान और नेत्रदान का संकल्प लेकर जो आवेदन भरवाए गए थे उनमें अब तक जिले से 11 का देहदान हो चुका है। देहदानियों में सुंदरा देवी, रामलली ,राम सागर, जगदीश, मिश्रीलाल, शंकरा, प्रभु देवी, सुखराम, रामदुलारी, जगवंती के बाद मंगला आदि शामिल हैं।
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