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किराए के कमरे में चलता मिला मदरसा, फर्श पर तालीम ले रहे थे बच्चे

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बाराबंकी। गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे मंगलवार को जिले में शुरू हो गया है। पहले दिन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने आलापुर और बंकी में दो मदरसों का निरीक्षण कर 12 बिंदुओं पर सर्वे किया है। दोनों मदरसे बिना मान्यता के संचालित हो रहे थे।
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एक किराए के कमरे में जमीन पर बिठाकर बच्चियों को तालीम दे रहा था तो दूसरे में व्यवस्थाएं तो ठीक मिलीं पर उसकी संबद्धता दारूल उलूम देवबंद से बताई गई है। मगर इन मदरसों में पढ़ाया जा रहा पाठ्यक्रम कुछ तय नहीं था और न ही पढ़ाने वाले सही जानकारी दे पाए। बीएसए और एसडीएम की टीम पहले दिन सर्वे पर नहीं निकली।
प्रदेश सरकार ने गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे का आदेश दिया था। इस पर एडीएम को नोडल बनाकर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी क्षेत्र के एसडीएम और बीएसए की तीन सदस्यीय कमेटी 12 बिंदुओं पर जांच करेगी। मंगलवार को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शहर के आलापुर में चल रहे मदरसे की जांच करने पहुंचे तो हड़कंप मच गया।
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यहां पर 60 बच्चियां पंजीकृत थीं जिन्हें फर्श पर बिठाकर तालीम दी जा रही थी। यहां पाठ्यक्रम क्या है, पंजीकरण कहां से है, आदि का कोई विवरण नहीं मिला। जबकि 2019 से यह मदरसा यहां संचालित हो रहा है।
बंकी कस्बे में स्थित करीब 55 वर्ष पुराने मदरसे में सर्वे के दौरान साफ-सुधरे 30 कमरे व कम्यूटर कक्ष भी दुरुस्त मिला। यहां पर 200 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 130 यहां रहकर तालीम ले रहे हैं। मान्यता के नाम पर दारूल उलूम देवबंद से अपनी संबद्धता दिखाई। मदरसा बोर्ड से दोनों ने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया।
इस कारण सरकार का इन पर कोई नियंत्रण ही नहीं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बालेंदु द्विवेदी ने बताया कि पिछले वर्ष कराए गए सर्वे में 90 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे चिह्नित किए गए थे। इनकी संख्या अब बढ़कर 100 से ऊपर हो गई है। यह मदरसे दारूल उलूम नदवा लखनऊ व देवबंद से संबद्ध कर के चलाते हैं। तो कई चिटफंड से कमेटियां बनाकर मनमाने तौर पर चलाते रहते हैं।
जबकि मान्यता के लिए निर्धारित कमरों की लंबाई चौड़ाई, शिक्षकों की योग्यता, कमेटी का पंजीकरण और अस्थाई मान्यता के लिए किराए का भवन होना आवश्यक है। पहले दिन दो मदरसों के सर्वे में जो तस्वीर सामने आई उसमें मदरसा बोर्ड में मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया गया। जबकि 320 मदरसे मान्यता पर चल रहे हैं। किंतु गैर मान्यता में तालीम लेने वाले एक हजार से अधिक बच्चे और बच्चियों का भविष्य अंधकार में है।
शासन के आदेश पर गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के चिन्हीकरण कर सर्वे का कार्य शुरू करा दिया गया है। निर्धारित समय पर जांच पूरी कर रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को सौंप दी जाएगी। मदरसे किसकी जमीन पर चल रहे हैं, इस संबंध में जांच के कोई आदेश नही हैं।
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-राकेश सिंह, एडीएम
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