बच्चों को पढ़ना लिखना भले न आए, लेकिन मैडम को कार चलाना जरूर आना चाहिए। आपको सुनने में यह कुछ अटपटा जरूर लग रहा होगा, मगर यह सौ फीसदी सच है। बुधवार को कार सीखने के लिए पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुसैनाबाद की शिक्षिकाओं ने सिर्फ इसलिए समय से एक घंटा पहले स्कूल बंद कर बच्चों को घर भेज दिया, क्योंकि उन्हें खुद कार चलाना सीखना था।
विद्यालय में ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ, बल्कि शिक्षिकाओं का कार सीखने का क्रम पिछले पांच दिनों से चल रहा है। ऐसे में बच्चों का भविष्य क्या होगा? यह बताने की जरूरत नहीं है। जिम्मेदार लोगों ने ही सर्व शिक्षा अभियान को मजाक बनाकर रख दिया है।
‘बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं।’ ‘बच्चों की प्राथमिक शिक्षा मजबूत होगी तभी उनका कल संवरेगा।’ ऐसे न जाने कितने नारे सरकारी स्कूलों के आसपास लिखे होते हैं। सरकार भी प्राथमिक शिक्षा पर हर साल अरबों रुपये खर्च करती है, लेकिन पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुसैनाबाद में तैनात महिला शिक्षकों के लिए इन नारों का कोई मतलब नहीं है।
जिले में स्कूलों के खुलने का समय सुबह आठ बजे है। शिक्षकों को आधा घंटा पहले पहुंचना होता है, लेकिन यहां तो स्कूल खुलता ही नौ बजे है और 12 बजे के आसपास बंद हो जाता है। इसका कारण ये है कि बच्चों को पढ़ाने से ज्यादा यहां तैनात शिक्षकों की रुचि कार सीखने में ज्यादा है।
कार सीखने का क्रम पिछले पांच दिनों से चल रहा है। बुधवार को भी यही हुआ। 12 बजे स्कूल को बंद कर बच्चों को घर जाने के लिए कह दिया गया, लेकिन बच्चे भी रोज का तमाशा छोड़कर कहां जाने वाले हैं। उनको भी पढ़ाई से ज्यादा मजा अपनी मैडम जी का कार सीखना देखना ज्यादा अच्छा लगता है। फिर क्या था स्कूल के गेट में ताला लग गया और बच्चे बाहर मैदान में एकत्र हो गए। उसके बाद शुरू हुआ कार चलाना सीखने का खेल।
बारी बारी से मैडम लोग कार चलाना सीखती रहीं और बच्चे ताली बजाते रहे। कुछ ही देर में दूसरे स्कूलों की भी तीन मैडम आ गईं और उन्होंने ने भी अपने कार की ड्राइविंग सीट पर बैठकर सटीक ड्राइविंग की बारीकियां सीखी। देखते-देखते ग्रामीणों और राहगीरों का भी मजमा लग गया। सब खड़े होकर अपनी मैडम के हुनर की दाद दे रहे थे।
सिर्फ 53 बच्चे पंजीकृत हैं यहां
इस विद्यालय में मात्र 53 बच्चे पंजीकृत हैं तथा इनको पढाने के लिए प्रधानाध्यापिका कुसुम चौधरी के साथ सविता रानी, आनंदी मिश्र, नीलम दीक्षित व अनीता चार सहायक अध्यापक तैनात हैं। विद्यालय के बाहर मौजूद विद्यार्थियों ने कहा कई दिनों से बारह बजे से पहले विद्यालय बंद कर मैडम चली जाती हैं तथा सुबह भी विद्यालय साढे़े नौ बजे खुलता है।
बच्चों ने कहा समीप के विद्यालयों की मैडम भी अक्सर बारह के पहले पहुंच जाती हैं जिसके बाद सभी लोग मिलकर कार चलाना सीखती हैं। इस बारे में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कुसुम चौधरी ने बताया कि बीआरसी कार्यालय में विद्यालय के बच्चों के लिए किताब लेने के लिए थोड़ा पहले विद्यालय छोड़ा था, लेकिन वहां अन्य अध्यापिकाएं मौजूद थीं।
विद्यालय के समय पर विद्यालय बंद कर कार सीखने का प्रयास करना गलत है। मामले की जांच करा कर दोषी अध्यापिकाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- मनमोहन सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी