बाराबंकी। अवैध तरीके से चल रहे अस्पताल आम आदमी के साथ ही साथ कानून व्यवस्था के लिए भी सिरदर्द बनते जा रहे हैं परंतु जिम्मेदार इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाए सिर्फ नोटिस जारी कर देते हैं।
जिले में करीब 225 अस्पताल, 45 क्लीनिक और 60 के आसपास पैथालॉजी पंजीकृत हैं जबकि हकीकत में इनकी संख्या इससे कई गुना है। ये झोलाछाप अपना अस्पताल कोठी, भानमऊ, सतरिख, हरख, टिकैतनगर, बारिनबाग, बदोसरायं, बेलहरा, सूरतगंज, मसौली आदि कस्बों और गांवों की गलियों में संचालित कर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इनका संचालन करने वालों के पास न तो कोई डिग्री है और न ही कोई डिप्लोमा। यहीं कारण है कि आए दिन कहीं न कहीं बवाल होता रहता है।
सबसे खराब स्थिति ग्रामीण इलाकों की है यहां पर झोलाछाप मरीज आते ही तख्त और बेंच पर लिटा ग्लूकोज की बोतल चढ़ा देते हैं और रकम ऐंठने के चक्कर में ताबड़तोड़ कई इंजेक्शन लगा देते हैं लेकिन जब मरीज की हालत बिगड़ती है तो रेफर कर पर्चा थमा देते हैं। इस बाबत प्रभारी सीएमओ डॉ. डीके श्रीवास्तव का कहना है कि नोडल अधिकारी द्वारा समय-समय पर अवैध अस्पतालों की जांच कर कार्रवाई की जाती है।
गलत इलाज से गई बालक की जान
दुल्हदेपुर निवासी राजितराम ने बताया कि उनके पुत्र रोहित (10) को तेज बुखार था गांव में ही एक झोलाछाप के पास उपचार को लेकर गए थे। दो इंजेक्शन लगाए दवा दी इसके कुछ देर बाद हालत बिगड़ गई। हम लोग जिला अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में मौत हो गई।
इजेंक्शन लगते ही मासूम ने तोड़ा दम
खजुरिहा गांव के रहने वाले रंजीत ने बताया किए कल्पना (1) उल्टी दस्त और बुखार पर इलाज के लिए मरकामऊ स्थित एक झोलाछाप के पास ले गए थे। बताया कि झोलाछाप ने जैसे ही इंजेक्शन लगाया उसके तुरंत बाद उसकी हालत बिगड़ गई और देखते ही देखते मौत हो गई।