बाराबंकी। रामसनेहीघाट कोतवाली क्षेत्र में एक साल नौ माह पहले हुए चर्चित रामजस हत्याकांड में विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट बीना नारायण की कोर्ट ने मृतक की पत्नी रूपरानी व प्रेेमी मोहित वर्मा को दोषी माना है। कोर्ट ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास के साथ ही 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
रामसनेहीघाट कस्बे के बुधराम ने कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि 22 दिसंबर 2023 की रात खाना खाने के समय बहू रूपरानी ने कहा था कि आप लोग यहीं पर खा लीजिए। हम छप्पर में पति के साथ खाएंगे। पुत्र रामजस उर्फ गुल्ले व बहू उसी छप्पर में लेटते-बैठते थे। अगले ही दिन 23 दिसंबर की सुबह जब बुधराम उठे तो पुत्र रामजस बिस्तर पर नहीं मिला। बहू से पूछा तो बताया कि वह सुबह तीन बजे उठकर कही गए थे। इसके बाद बुधराम ने पुत्र को कई जगह तलाशा लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला।
वादी ने बताया कि उसकी बहू अक्सर लड़के से झगड़ा करती थी तथा बहू के संबंध गांव के ही मोहित उर्फ धीरेंद्र से थे। रामजस इसका विरोध करता था। एक बार बहू रूपरानी ने रामजस को जहरीला पदार्थ भी खिला दिया था, जिससे वह बेहोश हो गया था। 25 दिसंबर 2023 को रामजस का शव गांव में ही शिवा के कुएं में मिला था। पुलिस ने इस मामले में मृतक की पत्नी व मोहित उर्फ धीरेंद्र को दोषी ठहराते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। साक्ष्य व गवाही के आधार पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।