बाराबंकी। जिला अस्पताल में सोमवार को मरीजों को इलाज कराने से पहले परचा बनवाने के लिए ही घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ा। डॉक्टर कक्ष से लेकर दवा वितरण केंद्र तक मरीजों की लंबी लाइनें लगी रहीं। भीड़ अधिक होने के कारण कई मरीज बिना इलाज और जांच कराए ही वापस लौट गए।
जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को कुल 1,927 मरीजों का उपचार किया गया। इनमें सर्दी, जुकाम और बुखार के 329, बदन दर्द के 297, पेट दर्द के 311, त्वचा रोग के 328 और हड्डी रोग के 291 मरीज शामिल रहे। इलाज कराने पहुंचे साहिल, मोहनलाल, माया देवी और कौशल ने बताया कि उन्हें करीब एक सप्ताह से बुखार आ रहा था।
निजी चिकित्सक से उपचार कराने के बाद भी राहत नहीं मिली, जिसके बाद वे जिला अस्पताल पहुंचे। उनका कहना था कि परचा बनवाने के लिए दो घंटे तक लाइन में लगना पड़ा। इसके बाद डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने में ही पूरा समय निकल गया। जांच कराने पहुंचे तो अगले दिन आने के लिए कहा गया।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. जेपी मौर्य ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल प्रशासन सभी मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास कर रहा है।
कर्मचारियों की कमी से प्रभावित हो रहीं स्वास्थ्य सेवाएं
हैदरगढ़। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारियों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। सीएचसी हैदरगढ़ में फार्मासिस्ट के तीन स्वीकृत पद हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से केवल एक फार्मासिस्ट, अंबरीश मिश्रा ही तैनात हैं। यही फार्मासिस्ट ओपीडी के साथ 24 घंटे संचालित आपातकालीन सेवाओं की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
प्रतिदिन लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और अन्य मार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के घायल मरीजों के अलावा ओपीडी में करीब 300 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। वहीं, दो थानों की पुलिस मेडिकोलीगल परीक्षण के लिए घायलों और आरोपियों को भी यहीं लाती है। ऐसे में एक ही फार्मासिस्ट पर कार्यभार बढ़ गया है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. जयशंकर पांडेय ने बताया कि कर्मचारियों की कमी से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। फिलहाल पीएचसी से फार्मासिस्ट और चिकित्सकों की ड्यूटी लगाकर व्यवस्था संचालित की जा रही है। संवाद