हैदरगढ (बाराबंकी)। युवक पर हमले के बाद से तेंदुए की पिछले दो दिनों से कोई आहट नहीं मिली। तेंदुए के लोनी नाला के जंगल में छुपे होने की आशंका है। वन विभाग की भी फिलवक्त कोई कवायदें दिखाई नहीं दे रही हैं। वन विभाग ग्रामीणों से मिलने वाली सूचनाओं के सहारे बैठी है। हालांकि अफसरों का दावा है कि तेंदुए के पगचिन्ह देखकर काम्बिंग की जा रही है। पिजरा लगाया गया है।
क्षेत्र में 27 दिसंबर को गांव लोधे सिंह पुरवा के पास बकरी का शिकार कर तेंदुआ पूर्वाचंल एक्सप्रेस वे की ड्रेन में छुपा था। वन कर्मियों व ग्रामींणों के पहुंचने पर एक्सप्रेस वे के दूसरी ओर निकल कर भाग गया। पास के कई गांव में गन्ने के खेत, माइनर नहर पटरी आदि स्थानों पर दिखाई पड़ने की सूचना पर वन विभाग की टीम कांबिंग कर हांका लगा रही थी। इसी बीच 31 दिसबंर को लोनीकटरा के भितरी के बाहर बाग में तेंदुए ने युवक पर हमला कर दिया।
मौक पर पहुंची टीम को मिले पगचिन्हों से तेंदुआ होने की पुष्टि की गई। पगचिन्हों का पीछा करते हुए टीम लोनी नाला के जंगलों तक पहुंची। जंगल घना होने से अंदर पड़ताल नहीं हो सकी। लेकिन इसके बाद तेंदुए की कोई गतिविधि नहीं दिखाई पड़ी। इससे तेंदुआ के लखनऊ की ओर जाने की संभावना पर टीम वापस लौट गई। दो दिन वन विभाग ने तेंदुए को लेकर कोई कवायद नहीं की। जिले से भेजा गया पिंजड़ा भी नहीं लगाया गया है। हालांकि डीएफओ आकाशदीप वाधवान ने बताया कि तेंदुए की लोकेशन गोमती नदी के पार अमेठी के लालगंज वन क्षेत्र में मिली है। पगचिन्ह भी दिखाई दिए हैं। एहतियातन काम्बिंग की जा रही है। पिंजरा लगा हुआ है।