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चरसरी बांध में रिसाव से मचा हड़कंप

Fri, 29 Jul 2016 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
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एलिग्न-चरसरी बांध में रिसाव से मचा हड़कंप - फोटो : अमर उजाला
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एलिग्न-चरसरी तटबंध में रिसाव शुरू हो गया है। शुक्रवार को घाघरा का जलस्तर भी घटने लगा जिससे बांध के लिए खतरा बढ़ गया है। क्योंकि नदी की धारा बांध से सटकर बहने लगी है। अब तक नदी और बांध के बीच की खाली पड़ी करीब 11 सौ बीघा भूमि घाघरा में समाहित हो चुकी है।
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धीरे-धीरे घट रहे पानी सेे बांध में कटान कम रही, मगर तेजी से पानी घटने व मसीना उठने पर बांध को कटने से बचाना प्रशासन के लिए मुश्किल होगा। वहीं नदी का पानी खतरे के निशान से 53 सेमी ऊपर अभी भी बह रहा है। 


एल्गिन-चरसरी बांध के डेंजर जोन ग्राम रायपुर के सामने बांध में तेजी से रिसाव हो रहा है। बाढ़ का पानी अब बांध के दूसरी तरफ  भी रिसाव कर भरने लगा है। जो बांध के लिए खतरे की घंटी है। अब तक घाघरा की धारा और बांध के बीच करीब 300 से 400 मीटर तक का फासला होता था। पानी बढ़ने पर बांध तक पानी आने के साथ ही टकराने लगा है।
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नदी ने बीच की खाली पड़ी जमीन को काट कर अपनी धारा में समाहित कर लिया है। तथा सीधे बांध से सटकर बहने लगी है। शुक्रवार को घाघरा के घटते जलस्तर से मामूली कटान हुई। यदि पानी तेजी से घटा तो बांध में तेजी से कटान होगी। बांध के लिए सबसे बड़ा खतरा नदी में उठने वाला मशीना बन गया है।

एक बार मशीना उठने से करीब चार मीटर से अधिक भूमि या बांध कटकर नदी की धारा में चला जाता है। नदी अब तक करीब 11 सौ बीघा भूमि समाहित कर  चुकी है। तथा करीब 10 से अधिक बार मसीना उठ चुका है। मसीना उठने से प्रशासन की सारी कवायदें फेल हो जाती हैं तथा कटान को रोक पाना मुश्किल हो जाता है। 

तेजी से पानी घटा तो होगी दिक्कत
बंाध पर मौजूद सहायक अभियंता अशोक कुमार बताते हैं कि घाघरा अब बांध से सटकर बह रही है। पानी धीरे-धीरे घट रहा है। जिससे खतरा नहीं है। यदि तेजी से पानी घटा तो दिक्कत हो सकती है। फिलहाल बचाव कार्य जारी है।

रिसाव से खतरा नहीं
बांध पर कैंप कर रहे जेई ओंकार सिंह ने बताया कि बांध के दूसरे तरफ  पानी का रिसाव होने से कोई खतरा नहीं है। रेत से रिसाव हो सकता है। फिलहाल जहां भी रिसाव है उसे बंद कराया जा रहा है।

दो हिस्सों में बंटा परसावल
परसावल में पानी का सैलाब है। पूरा गांव जलमग्न है तथा ग्रामीण गांव से पलायन कर चुके हैं। इसके पूर्व परसावल गांव में इतना पानी नहीं होता था। जिस तरह से घाघरा ने अपना दायरा बढ़ाकर ग्राम रायपुर मांझा को अस्तित्व विहीन कर दिया।

उसी तरह अब परसावल को नदी ने दो हिस्सों में बांट दिया है। जिसमें एक हिस्से में हमेशा बाढ़ का पानी आ जाता था तो दूसरा हिस्सा खास परसावल बाढ़ से अछूता होता था। मगर इस वर्ष घाघरा ने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया है। इस गांव की करीब 48 सौ की आबादी गांव छोड़ कर सुरक्षित स्थान पर जा चुकी है।

पानी के 20 मीटर नीचे उठता मसीना
आखिर क्या है ये जल बवंडर (मसीना)। इसका सही नाम अंडर माइनिंग वाटर प्रेशर है। जैसे आम तौर पर हवा के बवंडर अक्सर देखे जाते हैं वैसे ही ये पानी का बवंडर होता है। परंतु हवा के बवंडर की अपेक्षा इसमें उल्टा होता है क्याेंकि हवा का बवंडर जमीन से उठकर ऊपर की ओर होता है जबकि पानी के बवंडर में ठीक उल्टा। पानी का बवंडर ऊपर कम और नीचे अधिक प्रेशर होता है।

जो कि पानी के नीचे लगभग 20 मीटर तक का हो सकता है। इसके आने का कोई निश्चित समय नहीं होता फिर भी यह अक्सर सुबह चार बजे या शाम के चार बजे के आसपास ही आता है। जब जलस्तर मे तेजी के साथ गिरावट होती है तब भी मसीना का खतरा बना रहता है।

कटान का दूसरा बड़ा कारण विंड प्रेशर बताया जाता है जो कि एल्गिन चरसरी बांध के लिए खतरनाक बताई जाती है। जब पूरब या दक्षिण वाली हवाएं तेजी से चलती हैं तब विंड प्रेशर बांध पर पड़ता है और तब भी कटान की पूरी संभावना बनी रहती है।
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