जिले में विदेशी पक्षियों की आमद शुरू हो गई है। हैदरगढ़ क्षेत्र की मदहा झील में पक्षियों का कलरव गूंजने लगा है। वन विभाग ने मेहमान पक्षियों के संरक्षण व सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा दी है। जैसे-जैसे ठंड और कोहरा बढ़ेगा वैसे-वैसे साइबेरियन पक्षी किरकिच्ची, खजुवा व सराही झील की ओर अपना रुख और तेज कर देंगे।
जिले में एक दर्जन से अधिक झीलें हैं। इनमें से हैदरगढ़ की मदहा झील, देवा की सारस विहार, बेलहरा की किरकिच्ची, जैदपुर की कमरावां, रामनगर की सराही, सूरतगंज के पास भगहर झील प्रमुख हैं। यहां पर हर वर्ष सर्दी के मौसम में हिमाचल प्रदेश, तिब्बत व लद्दाख के अलावा चीन, पाकिस्तान समेत जहां पर बर्फबारी अधिक होने से झीलों का पानी जम जाता है, वहां के पक्षी अपने अनुकूल जलवायु की ओर विचरण करते हुए यहां आते हैं। हिमाचल प्रदेश में तीन दिन पूर्व हुई तेज बर्फबारी से हैदरगढ़ क्षेत्र की मदहा झील में साइबेरियन पक्षियों की आमद शुरू हो गई है।
चौबीसी, भिखरा गांव के देवेंद्र विजय सिंह, गंगा बक्श, रामदेव रावत, मुन्ने शुकुल व जसोमति शर्मा बताते हैं कि रायबरेली जिले की सीमा से सटी इस झील में तीन दिन से विदेशी पक्षियों का आना शुरू हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि जैसे-जैसे तापमान कम होता जाता है, पक्षियों की संख्या बढ़ती जाती है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पक्षी दिसंबर में आते हैं और फरवरी-मार्च तक रुकते हैं। विभाग को ऐसे पक्षियों के आने की सूचना मिलते ही शिकार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है और देखरेख के लिए रेंजरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन पक्षियों को भा रही यहां की झीलें : देवा की सारस विहार व खजुआ झील में सारस भारी संख्या में आते हैं। वहीं किरकिच्ची झील, मदहा झील, कमरावां झील समेत प्रमुख झीलों में स्पूनडिल, कुक्ट्स बर्ड, कारबोरेंट, नरहेन बर्ड आदि विदेशी पक्षी भारी तादाद में शरण लेते हैं। पक्षियों की आमद शुरू होते ही शिकारी इनके शिकार के फिराक में लग गए हैं।
हैदरगढ़ क्षेत्र के मदहा झील में दो दिन से साइबेरियन पक्षियों के आने की जानकारी हुई है। क्षेत्रीय रेंजर व वन विभाग के कर्मचारियों को इनकी देखरेख करते हुए शिकार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने को कहा गया है। दिसंबर से मार्च तक इनकी निगरानी की जाती है। - जावेद अख्तर, डीएफओ