बाराबंकी। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए शासन ने एएनएम और आशा बहू को घर-घर जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसमें पंचायत को एक पल्स ऑक्सीमीटर और आई आर थर्मामीटर की खरीद कर देना था। जिलेे की प्रत्येक ग्राम पंचायत में यह दोनों उपकरण आपूर्ति तो कर दिए पर इसकी खरीद कितने की हुई, किसको करना था, यह कुछ पंचायतों को छोड़कर किसी को पता नहीं चला। गुपचुप तरीके से कुछ संस्थाओं ने केन्द्रीय क्रत ढंग से इसकी आपूर्ति कर दी।
कोविड किट की 28 सौ रुपये कीमत निर्धारित है पर इसके लिए सात से आठ हजार तक भुगतान की तैयारी चल रही थी। इसी बीच मामला सुल्तानपुर जिले के लंभुआ विधायक देवमणि द्विवेदी द्वारा उठाने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। कार्रवाई से हड़कंप मचा तो जिले के आलाधिकारी एक प्रपत्र जारी कर एडीओ पंचायत से दस बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनमें करीब सौ गांव में निर्धारित कीमत से अधिक भुगतान कर दिया गया। शेष एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में अभी भुगतान नहीं हुआ है। इस कारण बड़ा घोटाला होने से बच जाएगा।
जिले में महामारी से निपटने के लिए जिला प्रशासन से लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं ने कड़ी मेहनत से लोगों की सेवा की। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी कम सराहनीय नहीं थी। लॉकडाउन हो या अनलॉक इस दौरान लोगों को मास्क सैनिटाइजर से लेकर खाने और पानी का इंतजाम भी कम नहीं था। गांव-गांव प्रवासियों को रोजगार देना हो या फिर कोविड अस्पतालों की लखनऊ जैसी व्यवस्था को खूब सराहना मिली।
इस दौरान शासन द्वारा डोर-टू-डोर सर्वे करने के लिए आशा बहू, एएनएम की ड्यूटी लगाई गई। इन्हें प्रत्येक पंचायत से पल्स ऑक्सीमीटर और आइआर थर्मामीटर 2800 रुपये में खरीदने के आदेश दिए गए। यह खरीद कब हुई, किसी को नहीं पता। ब्लॉक कर्मियों द्वारा दोनों उपकरण पंचायतों के माध्यम से एएनएम को उपलब्ध करा दिए गए। इनकी खरीद और भुगतान की जानकारी 90 प्रतिशत प्रधानों को जिले में नहीं थी। 1169 ग्राम पंचायतों से करीब 100 ग्राम पंचायतों में भुगतान सात से आठ हजार रुपए तक कुछ संस्थाओं को कर दिया गया। यह बात अधिकारी भी स्वीकार करते हैं। पर बचाव में वह कहते हैं कि इसमें गांव को सैनिटाइज कराने व अन्य वस्तुएं शामिल हैं।
उधर, पंचायत विभाग में एक प्रपत्र जारी कर दस बिंदुओं पर एडीओ पंचायत से रिपोर्ट मांगी गई। जिसमें क्रय की तारीख से लेकर कीमत और भुगतान तक का डिटेल मांगा गया था। सूत्र बताते हैं कि गनीमत यह रही कि अधिकांश पंचायतों में इसका भुगतान अभी नहीं हुआ है। किंतु जिन संस्थाओं ने दोनों चीजें आपूर्ति की वह अब फंस गए हैं क्योंकि विभागीय कर्मचारी व अधिकारी सुल्तानपुर की घटना के बाद अपना दामन बचाने के लिए 2800 से अधिक भुगतान करने वाले के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है।
मानकों की अनदेखी कर हुआ भुगतान
महामारी के इस दौर में कमीशन बाजी के लिए जरिए बड़े घोटाले की तैयारी थी। देवा ब्लॉक की 88 ग्राम पंचायतों में से 42 ग्राम पंचायतों में कोरोना किट का भुगतान सात हजार से लेकर आठ हजार 920 रुपये तक फर्म को किया जा चुका है। वीडियो और एडीओ पंचायत देवा का दावा है कि सरकारी रेट पर ही पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर की खरीद की गई है।
प्रधानों को खरीदारी की नहीं जानकारी
हैदरगढ़ ब्लॉक के रनापुर ग्राम पंचायत के प्रधान-जतिन चौधरी, मरुई के संजय सिंह, पोहरामऊ के दुर्गा सिंह चौहान व त्रिवेदीगंज ब्लॉक के अभय प्रकाश सिंह आदि ने बताया कि पंचायत सचिव द्वारा ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर भेजा गया था, कितने में खरीदा गया यह नहीं बताया। न ही इसका कोई भुगतान किया गया है। सूरतगंज ब्लॉक के प्रधान संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर समेत कई प्रधानों ने कहा कि कोविड किट की खरीदारी की कोई जानकारी नहीं है। न ही कोई किट भेजी है और भुगतान किया गया हैै।
जिले में कोविड किट की खरीद शासन के नियमों के अनुरूप 2800 रुपये में ही की गई है। खरीद संस्थाओं से की गई है या पंचायतों ने खरीदा है, यह जानकारी नहीं है लेकिन सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में जो अधिक भुगतान किया गया है, उसमें गांव को सैनिटाइज कराने के लिए अन्य वस्तुओं का भुगतान भी शामिल है। जो भी पंचायत शासनादेश के विपरीत काम करेंगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- रणविजय सिंह, डीपीआरओ बाराबंकी