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अपने ही शहर में भुला दिए गए खुमार बाराबंकवी

Sun, 21 Feb 2016 12:08 AM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
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‘दुश्मनों से प्यार होता जाएगा, दोस्तों को आजमाते जाइये।’ जैसे शेर कह कर देश दुनिया में बाराबंकी का नाम रोशन करने वाले खुमार बाराबंकवी की पुण्यतिथि पर उनका शहर ही उनको भूल गया। इस मौके पर कहीं कोई आयोजन ही नहीं हुआ। हालांकि देर शाम सदर विधायक सुरेश यादव ने शहर कोतवाली के पास स्थित उनकी मजार पर फूल चढ़ाए।
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15 सितंबर वर्ष 1919 को जन्मे खुमार का नाम यूं तो मोहम्मद हैदर खान था लेकिन शायद ही कोई उनके इस नाम से वाकिफ  हो, वह बाराबंकवी या खुमार साहब के नाम से मशहूर थे। उन्होंने बाराबंकी जिले को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाई। 1938 से ही उन्होंने मुशायरों में भाग लेना शुरू कर दिया। खुमार ने अपना पहला मुशायरा बरेली में पढ़ा। ढाई वर्ष के अंतराल में ही वे पूरे मुल्क में प्रसिद्ध हो गये। उस दौर में जिगर मुरादाबादी और मजरूह सुलतानपुरी के बाद लोग खुमार साहब को सुनना पसंद करते थे। खुमार को वर्ष 1942-43 में फिल्म निर्देशक एआर अख्तर ने मुंबई बुला लिया।

इनके लिखे गीत, ‘तस्वीर बनाता हूं तेरी तस्वीर नहीं बनती...’ को केएल सहगल ने आवाज दी थी। दिल की महफिल सजी है चले आइए.., साज हो तुम आवाज हूं मैं.. आदि गीत काफी लोकप्रिय हुए। खुमार की पुस्तकें कई विश्वविद्यालयों के पाठयक्रम में शामिल की गईं। तबियत खराब होने के कारण 13 फरवरी 1999 को उन्हें बाराबंकी जिला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने 20 फरवरी को अंतिम सांस ली। विडंबना यह है कि इस मशहूर शायर को उनकी पुण्य तिथि पर उनका ही शहर उन्हें भूल गया।
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इस मौके पर कहीं कोई आयोजन ही नहीं हुआ। हालांकि देर शाम सदर विधायक सुरेश यादव ने कोतवाली के पास स्थित खुमार बाराबंकवी के कब्र पर फूल चढ़ाए। उनके साथ देवा ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि रमेश यादव, रिजवान संजय, अमित वर्मा आदि मौजूद थे।
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