कोटवाधाम (बाराबंकी)। भक्त दलगंजन इंटर कॉलेज के प्रबंधक, साहित्यकार एवं कवि दीपक सिंह की अवधी भाषा में लिखी किताब कजरी भाषा के विकास में सहायक बनेगी। भारतीय भाषा संस्थान मैसूर के प्रभारी डॉ. लक्ष्मी नरायन चौधरी ने दीपक सिंह की पुस्तक को भाषा के विकास में सहायक मानते हुए किताब को डिजिटल करने की अनुमति पत्र भेजकर मांगी है।
सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के छोटे से गांव खजुरी के रहने वाले दीपक सिंह द्वारा लिखित यह किताब अब भारतीय भाषा अनुसंधान के माध्यम से अवधी भाषा के विकास में सहायक बनेगी। दीपक सिंह ने बताया कि कजरी पुस्तक में शुद्ध अवधी भाषा का प्रयोग किया गया है। गांव के परिवेश की कहानी को अवधी शब्दों में पिरोया गया है।
बताया कि कहानी की पात्र कजरी नाम की एक महिला है जो अभावग्रस्त जीवन में काफी संघर्ष के बाद अपने पैरों व पखड़ी होती है। एक प्रकार से कजरी पुस्तक महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली रचना है। लेखक दीपक सिंह ने कहा कि यह गौरव की बात है कि अवधी भाषा के विकास में उनकी पुस्तक को भारतीय भाषा संस्थान ने उपयोगी माना। अब यह पुस्तक पूरे देश में पढ़ी जाएगी। (संवाद)