हैदरगढ़ (बाराबंकी)। पाले और शीतलहर से फसलों की सुरक्षा के लिए खेत में सिंचाई करना एक प्रभावी उपाय है। मिट्टी में नमी रहने से तापमान में अचानक गिरावट नहीं होती है। दीर्घकालिक उपाय में खेत में उत्तर पश्चिम मेड़ों पर हवा को रोकने वाले पेड़ लगाएं। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि सिंचाई से मिट्टी का तापमान 0.5 से दो डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इससे फसल पर पाले का प्रभाव कम करने में मदद मिलती है। पाले के दिनों में फसलों पर 0.2 प्रतिशत घुलनशील गंधक या 0.1 प्रतिशत घुलनशील गंधक का तेजाब 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करने से फसलों को दो सप्ताह तक के लिए पाले से सुरक्षित रख सकते हैं। पाले की संभावना होने पर खेत के उत्तर-पश्चिम दिशा में कचरा या सूखी घास जलाकर धुआं करने से तापमान चार डिग्री तक बढ़ने में मदद मिलती है। खेतों की उत्तर पश्चिम मेड़ों पर शीशम, खेजड़ी, शहतूत, बबूल, जामुन पेड़ लगाकर वर्षों तक ठंडी हवाओं व पाले से फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं।