घाघरा नदी की कटान से लोगों में दहशत का माहौल है। नदी का पानी कटान करते हुए तीन गांवों के पास तक पहुंच गया है। इससे लोगों में हड़कंप मच गया है। वहीं कचनापुर के प्राथमिक विद्यालय पर अभी खतरा बना हुआ है। कटान की वजह से विद्यालय किसी भी समय नदी में समा सकता है। शनिवार को बीइओ ने मौके पर पहुंच विद्यालय के दरवाजे, खिड़कियां और पल्ले निकलवाकर सुरक्षित स्थान पर रखवा दिए।
सूरतगंज क्षेत्र के कचनापुर गांव के निकट घाघरा नदी के पानी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। नदी का पानी पिछले एक सप्ताह से कटान कर गांव की ओर बढ़ रहा है। लेकिन तहसील प्रशासन इसको लेकर जरा भी गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। सिर्फ राजस्व कर्मियों को मौके पर भेज फर्ज अदायगी की जा रही है। यदि नदी की कटान को रोकने के प्रयास किए गए होते तो शायद नदी का पानी गांव के किनारे तक नीं पहुंचता।
नदी का पानी कटान करते हुए तीन गांव कचनापुर, परसंडा और हेतमापुर तक पहुंच गया है। यहां के लोगों का कहना है कि नदी का पानी जिस तरह से कटान कर रहा है यदि यही हाल रहा तो पानी किसी भी समय गांव के अंदर तक पहुंच सकता है।
तहसील कर्मी गांव तक आते हैं और चले जाते हैं लेकिन कटान को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। जिससे हम लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। तराई के लोगों का कहना है कि कचनापुर के पास बने प्राथमिक विद्यालय के पास कटान और तेज हो गई।
कटान को देखते हुए यही लग रहा है कि प्राथमिक विद्यालय किसी भी समय नदी के पानी में समा सकता है। इसकी जानकारी मिलते ही शनिवार को बीईओ प्रभाष कुंवर श्रीवास्तव गांव पहुंच विद्यालय की स्थिति का जायजा लिया। बीईओ ने बताया कि विद्यालय का पीछे का भाग कटान की भेंट चढ़ गया है। अंदर की फर्श भी इससे प्रभावित हुई है। नदी के पानी में विद्यालय कभी भी समा सकता है। इसको देखते हुए विद्यालय के पल्ले दरवाजे निकलाकर सुरक्षित स्थान पर रखवा दिए गए हैं। यहां पर पढ़ने वाले बच्चों को दूसरे विद्यालय में पहले ही शिफ्ट करा दिया गया था। शनिवार को नायब तहसीलदार मनोज कुमार और हल्का लेखपाल रामपाल मौके पर पहुंच स्थिति का जायजा लिया और लोगों से बातचीत की उनकी समस्याओं को सुना और निराकरण का आश्वासन दिया।