जिलाधिकारी के गोद लिए बहरौली व कुर्सी गांवों में पोषण की स्थिति बेहद खराब है। इन गांवों में स्थिति सुधरने की बजाय अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते बिगड़ती जा रही है। दो साल पहले डीएम के गोद लिए गांवों में कुपोषित बच्चों की संख्या 56 तक बढ़ी है। मौजूदा समय में इन दोनों गांवों में कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 63 हो गई है।
जिलाधिकारी द्वारा गोद लिए गांवों में पोषण की यह स्थिति है तो जनपद के अन्य गांवों की स्थिति का सहज आकलन किया जा सकता है। प्रदेश व जनपद में बच्चों के पोषण की स्थिति खराब होने की रिपोर्ट के आधार पर इसमें सुधार के लिए करीब दो साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने फतेहपुर तहसील के कुर्सी व बहरौली गांवों को गोद लिया था।
बहरौली गांव में 23 बच्चे और कुर्सी गांव में 27 बच्चे कुपोषित पाए गए थे। डीएम के इन दोनों गांवों को गोद लिए जाने पर बाल विकास पुष्टाहार विभाग व स्वास्थ्य विभाग ने भी इन दोनों गांवों पर विशेष ध्यान देना शुरू किया लेकिन इन गांवों में कुपोषित बच्चे होने का दाग नहीं मिटा सके।
दो साल पहले कुपोषित चिह्नित बच्चों में बहरौली में अब भी तीन बच्चे और कुर्सी में सात बच्चे कुपोषित हैं। इन दोनों गांवों में चौंकाने वाले तथ्य यह हैं कि इन गांवों में कुपोषित बच्चों की संख्या कम होने की बजाए बढ़ी है।
नए जिलाधिकारी अजय यादव ने करीब तीन माह पहले जिले की कमान संभाली। इनके कार्यकाल में कुर्सी व बहरौली गांवों में तैयार की गई कुपोषित बच्चों की सूची में बहरौली गांव में 16 और कुर्सी में 40 और बच्चे कुपोषण की सूची में शामिल हो गए हैं।