बाराबंकी। पावर कॉर्पोरेशन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उपभोक्ता पिछले एक वर्ष से अपना बिजली बिल सही कराने के लिए विभागीय दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन सिस्टम के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। शिकायतें हुईं, जांच कराने के आश्वासन मिले। मुख्यालय को पत्र भी भेजा गया, मगर नतीजा शून्य।
उल्टे बिल चार हजार से बढ़कर 17 हजार रुपये से ऊपर पहुंच गया। सवाल यह है कि जब विभाग अपने रिकॉर्ड तक दुरुस्त नहीं कर पा रहा, तो उपभोक्ताओं को राहत देने के दावे कितने भरोसेमंद हैं। पावर कॉर्पोरेशन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला जैदपुर बिजली उपकेंद्र क्षेत्र से सामने आया है।
यहां जयचंद्रपुर गांव निवासी मंशा देवी पिछले एक वर्ष से गलत बिजली बिल की समस्या से जूझ रही हैं, लेकिन विभाग अब तक समाधान नहीं कर सका है। विभागीय अधिकारियों के आश्वासन, ऑनलाइन शिकायतें और मुख्यालय को भेजे गए पत्र भी उपभोक्ता को राहत नहीं दिला सके।
मंशा देवी ने बताया कि 28 जून 2025 को ओटीएस योजना के तहत बकाया बिजली बिल का पूरा भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद एक सप्ताह बाद उन्हें 4100 रुपये का नया बिल थमा दिया गया। समस्या का समाधान न होने पर उन्होंने 15 दिसंबर 2025 को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
आरोप है कि 31 दिसंबर को शिकायत को मांग श्रेणी में दर्ज करते हुए स्पेशल क्लोज की भ्रामक रिपोर्ट लगाकर निस्तारित कर दिया गया। इतना ही नहीं, ऑनलाइन प्रणाली से उनका मोबाइल नंबर भी हटा दिया गया।
मंशा देवी का कहना है कि शिकायत के बाद एसडीओ ने स्पेशल क्लॉज की जांच कराने और बिल संशोधन के लिए मध्यांचल मुख्यालय को पत्र भेजने की बात कही थी, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो जांच पूरी हुई और न ही बिल सही किया गया। उल्टे 15 जून को उन्हें 17,602 रुपये का नया बिल थमा दिया गया। विभाग के चक्कर लगाते-लगाते वह थक चुकी हैं, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं हो रही।
क्या कहते हैं जिम्मेदार-
जैदपुर बिजली उपकेंद्र के एसडीओ शिवेंद्र मोहन ने बताया कि मामले की सूचना मध्यांचल मुख्यालय भेजी गई थी। मुख्यालय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी।