बाराबंकी। पत्नी को गुजारे भत्ते की धनराशि न देने वाले पति को पारिवारिक न्यायालय के अपर प्रधान न्यायाधीश द्वितीय कृष्ण कुमार ने जेल भेज दिया। इसके साथ ही पहले उसे जिन लोगोें की जमानत पर रिहा किया था, उनसे भी गुजारे की धनराशि की वसूली का आदेश दिया है। 24 फरवरी को सुनवाई की अगली तारीख है। धनराशि जमा नहीं कराने पर जमानतदारों को छह माह तक के कारावास की सजा का प्रावधान है।
वादी सपना गुप्ता की याचिका पर हैदरगढ़ थाना क्षेत्र के निवासी उनके पति राकेश गुप्ता को न्यायालय ने आठ वर्ष का पांच हजार रुपये प्रतिमाह की दर से चार लाख 80 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने आदेश 24 मार्च 2021 को दिया था। लेकिन वह देहरादून भाग गया। उसे पकड़कर हाजिर करने में पुलिस की हीलाहवाली पर जज ने नोडल अधिकारी अपर पुलिस अधीक्षक से भी जवाब तलब किया था। तब हैदरगढ़ कोतवाली पुलिस ने राकेश गुप्ता को 23 सितंबर 2024 को कोर्ट में हाजिर किया था।
कोर्ट में पति ने 2.40 लाख रुपये पत्नी को दिए और शेष धनराशि एक माह में अदा करने का वायदा किया। तब कोर्ट ने प्रदीप गुप्ता व निजाम की जमानत पर उसे रिहा कर दिया था। इसके बाद राकेश ने बकाया दो लाख 40 हजार रुपये नहीं दिए, तो 19 दिसंबर 2024 को जेल भेज दिया और जमानतदारों को बकाया जमा करने का नोटिस जारी किया। जमानतदारों ने जमानत वापस लेने की अर्जी दी, लेकिन जज ने उसे खारिज कर दिया। जज ने आदेश में कहा कि जमानत हटाए जाने संबंधी प्रार्थना पत्र विचार करना न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बनाने के समान है। जमानतदार शेष धनराशि जमा कराएं। न्यायालय के काउंसलर अधिवक्ता वीरेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि धनराशि जमा न करने पर जमानतदारों को छह माह तक के कारावास की सजा हो सकती है।