बाराबंकी। पत्नी की आत्महत्या के मामले में करीब एक साल जेल में बिताने वाले रामू रावत को छह साल बाद अदालत से राहत मिली है। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश असद अहमद हाशमी ने उसे दोषमुक्त करार दिया। मुकदमे में अहम मोड़ तब आया, जब रिपोर्ट दर्ज कराने वाले मृतका के पिता समेत अन्य गवाह अभियोजन के आरोपों से मुकर गए।
अभियोजन के अनुसार, 16 जुलाई 2020 को रामसनेहीघाट क्षेत्र के करौंदिया मजरे सनौली गांव निवासी रामू रावत की पत्नी रामकली उर्फ रेखा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जांच के दौरान महिला का शव फंदे से लटका मिला था। घटना के बाद मृतका के पिता माताफेर ने रामू और उसके पिता सद्गुरु के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान मृतका के पिता माताफेर अपने पूर्व के बयान से मुकर गए। उन्होंने अदालत को बताया कि उनसे तहरीर लिखवाकर अंगूठा लगवा लिया गया था। तहरीर में क्या लिखा था, यह उन्हें पढ़कर नहीं सुनाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि रामू ने कभी उनकी बेटी को परेशान नहीं किया। उनके मुताबिक, उनकी बेटी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।
अन्य गवाहों ने भी अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर रामू रावत को दोषमुक्त करार दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि महज कल्पना और अटकलों के आधार पर साक्ष्यों को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। इस फैसले के साथ ही करीब छह साल पुराने मामले में रामू को राहत मिल गई।