बाराबंकी। गुरुवार को देवां स्थित हाजी वारिश अली शाह बाबा की मजार पर होली खेलते हिंदू व मुस्लिम समुदाय के लोग।
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सूफी संत हाजी वारिस अली की मजार पर गुरुवार को अवध की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल होली का जश्न जोशो-ओ-खरोश के साथ मनाया गया। वारिस के आंगन में रंग-गुलाल इस कदर उड़ा कि उसकी छटा आसमां तक दिखाई दी। मजार परिसर में उड़े रंग बिरंगे अबीर गुलाल से इंद्रधनुषी छटा छा गई। कौमी एकता व सौहार्र्द के रंगों से लोग सराबोर हो गए।
कौमी एकता के लिए प्रसिद्ध देवा की होली की अपनी अलग ही रौनक रहती है। देवा की होली अवध की चांद कही जाती है। कौमी एकता की मिसाल देवा में सूफी संत हाजी वारिस अली की दरगाह पर हिंदू व मुस्लिम धर्म के लोगों ने हर्षोल्लास से होली मनाई। रंगों की बौछार के बीच गुरुवार को कौमी एकता द्वार से गाजे बाजे व डीजे के साथ जुलूस निकाला गया।
निर्धारित मार्गों से होता हुआ जुलूस सूफी संत हाजी वारिस अली के मजार परिसर पर पहुंचा जहां परंपरागत ढंग से होली का उत्सव मनाया गया। यहां फूलों की होली खेली गई इसके बाद उड़े रंग बिरंगे गुलाल से इंद्रधुनषी छटा सी छा गई। सूफी संत की मजार पर अनूठी होली में सभी वर्गों के लोगोें ने गले मिलकर एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाया।
गुरुवार का दिन होने के कारण मजार पर यह उत्सव देखने के लिए दूर-दूर से आए जायरीन मौजूद रहे। होली समिति के अध्यक्ष शहजादे आलम वारसी व सचिव जगदीश निगम ने बताया कि मजार शरीफ पर रंग गुलाल खेलने के साथ ही होली समापन की परंपरा है। इसी क्रम में मजार पर वारिस के भक्तों के रंग खेलने के साथ ही जुलूस का समापन हुआ।