रंगों का पर्व होली सिर्फ एक त्योहार ही नहीं बल्कि गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल भी है। जिले की कौमी एकता जो रब है वहीं राम है का संदेेश देेने वाली हाजी वारिस अली शाह की मजार पर भी जिस तरह रंग खेला जाता है और ऐसे अनूठे भाईचारे का उदाहरण शायद ही कहीं दिखता हो। इस पर्व को लेकर हिन्दू, मुस्लिम, सिख समेत अन्य जातियों के लोगों ने होली का पर्व मनाने को लेकर अपनी-अपनी राय व्यक्त की है।
शहर के ओबरी निवासी मसरूर अहमद अपनी मां, भाई, पत्नी, बेटे, बेटियों के साथ रहते हैं। मसरुर अहमद कहते हैं कि वह होली के दिन गुलाल व फूलों से परिवार व दोस्तों के संग होली खेलते हैं। चूंकि इस बार होली जुुमा को है तो इसलिए नमाज अदा करने के बाद वह अपने दोस्तों के घर जाकर होली की बधाई देंगे। होली के दिन घर में गुजिया के साथ पकवान का भी पूरा आनंद लेते हैं।
----------------
कस्बा व तहसील फतेहपुर के मोहल्ला ब्रहम्नीटोला निवासी संदीप जैन कहते हैं कि इस दिन पत्नी, भाई, बेटियों के साथ रंग व गुलाल में सराबोर होकर होली खेलते हैं। होली का त्योहार रंगों का त्योहार होता है। इसे हम लोग सब मिल जुल कर मनाते हैं। एक दूसरे के घर जाकर पकवान का मजा लेते हुए शुभकामनाएं देते हैं। रंगों का यह त्योहार प्रेम और सौहार्र्द का प्रतीक है। जैन धर्म भी हिंदू धर्म है। इसलिए पर्व को मनाने में कोई भेदभाव नहीं है।
--------------
हैदरगढ़ कस्बा के शांतिनगर कॉलोनी निवासी जयप्रकाश सिंह कहते हैं कि वह होली का पर्व मनाने को लेकर अभी से ही परिवार के अन्य सदस्यों शशी सिंह, विजय सिंह, व विमल सिंह समेत बच्चों के साथ एकत्रित हो गए हैं। होली के दिन सभी लोग रंगों में सराबोर होकर शांति व सादगी के साथ पर्व मनाएंगे। इस त्योहार का अपना अलग ही महत्व है। कचरी, पापड़, चिप्स, गुजिया व कपड़ें आदि की खरीद हो चुकी है।
---------------
फतेहपुर कस्बे के नालापार दक्षिणी के रहने वाले रेहान कहते हैं सौहार्द व प्रेम का त्योहार होली परिवार के साथ बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते चले आ रहे हैं। इस दिन गुजिया व नमकीन का आनंद लेने में खूब मजा आता है। इस बार भी नमाज के बाद अपने दोस्तों के घर देर शाम तक होली मिलने जाएंगे और मुबारकबाद देंगे।
---------------
शहर के बेगमगंज के रहने वाले व्यवसाई गुरप्रीत सिंह बताते हैं कि होली पर्व मनाने का अपना एक अलग मजा है। वह अपने दोस्तों व परिवार के सदस्यों के साथ मनाते चले आ रहे हैं। इस बार भी वह अपने पिता मलिंदर सिंह, भाई, मां, पत्नी व बच्चों के साथ रंगों में सराबोर होकर होली मनाएंगे। इस त्योहार केे धर्म और जाति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। यह सभी मनाते हैं। पर्व को लेेकर तैयारियां शुरु कर दी हैं।