बाराबंकी। सीएचसी-पीएचसी के बाद इलाज की आखिरी उम्मीद लेकर गरीब जिला अस्पताल पहुंचाता है। लेकिन जब उसे यहां से भी निराश लौटना पड़ता है तो यूं समझिए कि उसकी जान पर आ बनती है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल में कुछ ऐसा ही दिख रहा है। यहां पिछले करीब 15 महीने से जहां हृदयरोग का इलाज बंद है वहीं अब अल्ट्रासाउंड की जांच भी ठप हो गई है। इतना ही नहीं नाक, कान व गला के मरीजों को भी निराश लौटना पड़ रहा है क्योंकि संविदा की एक डॉक्टर मात्र तीन दिन ही आती हैं।
जिला अस्पताल के हृदयरोग विभाग का हाल सबसे खराब है। दिसंबर 2021 में हृदयरोग के चिकित्सक डॉ. संजीव वर्मा सेवानिवृत्त हुए तो ओपीडी में ताला लग गया। जबकि टू डी ईको जांच करने वाली मशीन तो सालों से कमरे में धूल खा रही है। उसे चलाने वाला विशेषज्ञ ही नहीं है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निरीक्षण में भी यह समस्या सामने आई थी।
उधर, नाक, कान गला के चिकित्सक का एक साल पहले गैर जिला ट्रांसफर होने के कुछ दिन बाद संविदा की एक चिकित्सक को जिला अस्पताल से अटैच किया गया। लेकिन वे सप्ताह में तीन दिन ही बैठती हैं। बाकी दिन नाक, कान व गले का इलाज होता ही नहीं। इन परेशानियों से जूझ रहे मरीजों को एक और झटका लगा है। एक सप्ताह पहले यहां तैनात रेडियोलाजिस्ट डॉ. एसके सिंह के सेवानिवृत्त होने से अल्ट्रासाउंड जांच भी बंद हो गई है।
डॉक्टर यह जांच तो लिख रहे हैं मगर गरीबों के पास इतना पैसा नहीं है कि बाहर जाकर कराए। एक अनुमान के अनुसार इन समस्याओं के कारण रोजाना करीब 150 से 200 मरीज बिना इलाज के लौट रहे हैं। जिनके पास धन नहीं है वह बिना इलाज के घर बैठ गए हैं।
500 डॉक्टर की फीस, 600 रुपये का अल्ट्रासाउंड
लखपेड़ाबाग मोहल्ले में केंद्रीय विद्यालय रोड पर रहने वाली भानमती बताती है कि निजी डॉक्टर की फीस 500 से कम नहीं है। जांच व दवा के अलग से। कम से कम जेब में डेढ़ हजार रुपये होने चाहिए। मकदूमपुर की शशी वर्मा बताती है कि मजबूरी में जिला अस्पताल के पास ही एक डायग्नोसिटक सेंटर पर 600 रुपये में अल्ट्रासाउंड करवाया। बनीकोडर के पूरे चुन्नू गांव निवासी लल्लू रावत बोले कि उनके पास इतने पैसे ही नहीं कि इलाज कराए इसलिए घर पर भगवान भरोसे बैठ गए।
हृदयरोग चिकित्सक का पद खाली है। नाक, कान गला के डॉक्टर न होने से संविदा चिकित्सक को तीन दिन के लिए अटैच किया गया है। इसको लेकर उच्चाधिकारियों को पहले ही सूचित किया जा चुका है।
- डॉ. राजेश कुशवाहा, चिकित्सा अधीक्षक