बाराबंकी। मौसम में आए बदलाव का असर अस्पतालों में साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक करीब 48 मरीज डायरिया के पाए गए। कहीं पर इन्हें भर्ती किया गया तो कहीं पर सिर्फ दवाएं लिखकर घर भेज दिया गया। यहीं नहीं रोक के बावजूद मरीजों को बाहर से जहां दवाएं लिखी जा रही है वहीं जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। जिससे अस्पतालों में आने वाले मरीज खासे परेशान हैं और जिम्मेदार इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
मरीजों को बेहतर उपचार की सुविधा मिले इसके लिए जिला अस्पताल समेत जिले में करीब 20 सीएचसी संचालित हो रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1500 से 2000 हजार मरीज आते हैं। वहीं सीएचसी पर प्रतिदिन 300 से 500 मरीज प्रतिदिन उपचार के लिए आते हैं। परन्तु जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम ये हैं कि उन्हें यहां पर न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही दवाएं यहां तक जांचें तक बाहर से करानी पड़ती हैं।
रोक के बावजूद डॉक्टर दवाएं और जांचे बाहर से लिख रहे हैं जिन्हें कराना अस्पताल में आने वाले मरीजों की मजबूरी बनता जा रहा है। बतातें चले कि जिला अस्पताल समेत सीएचसी के करीब 31 डॉक्टरों का तबादला हो जाने के बाद जिले की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से पटरी से उतरी हुई हैं। जिसे पटरी पर लाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं परन्तु हालात हैं कि सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पतालों में मिले डायरिया के 48 मरीज
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार को डायरिया के दो मरीज आए थे जिन्हें भर्ती कर लिया गया। इसके अलावा सिरौलीगौसपुर में 173 मरीज देेखे गए इनमें डायरिया के 8 मरीज रहे। इसी प्रकार बड़ागांव में 320 मरीज में डायरिया के 10, हैदरगढ़ में 320 में 7, त्रिवेदीगंज में 222 में 4, रामनगर में 324 मरीजों में डायरिया के 5, फतेहपुर में 325 मरीजों में डायरिया के 3 और मथुरानगर सीएचसी में 184 मरीज देखे गए इनमें डायरिया के 9 मरीज पाए गए। जिन्हें चिकित्सकों ने देखने के बाद बाहर से दवाएं लिखी और घर भेज दिया।
सीएचसी पर डायरिया समेत अन्य रोगों की दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। सभी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने की सुविधा भी है। इसके बावजूद यदि दवाएं बाहर से लिखी जा रही है तो गलत इसकी जांच कराकर ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ