बाराबंकी। जेल में अच्छे आचरण और सजा की अवधि का हवाला देकर समय पूर्व रिहाई की मांग करने वाले दुष्कर्म के दो दोषियों को बड़ा झटका लगा है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों की दया याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अब दोनों दोषियों को अदालत द्वारा तय की गई 20-20 साल की पूरी सजा काटनी होगी। वर्तमान में दोनों जिला जेल में बंद हैं।
पहला मामला दरियाबाद क्षेत्र का है। यहां 24 अप्रैल 2021 को सात वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात हुई थी। पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने चार अगस्त 2023 को दोषी गुड्डू (निवासी सुरजवापुर) को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय में उसकी अपील लंबित है। 15 जनवरी 2025 तक वह तीन साल, 11 महीने और 26 दिन की सजा काट चुका था। उसने अच्छे आचरण के आधार पर समय पूर्व रिहाई मांगी थी, लेकिन डीएम और एसपी की संस्तुति न मिलने और अपराध के गंभीर स्वरूप को देखते हुए राज्यपाल ने उसका आवेदन अस्वीकार कर दिया।
दूसरा मामला सतरिख थाना क्षेत्र का है, जहां तीन जुलाई 2015 को 15 वर्षीय किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। अदालत ने 13 फरवरी 2020 को दोषी राजेंद्र (निवासी भवानीपुर) को 20 साल कैद की सजा सुनाई थी। फरवरी 2026 तक वह नौ साल, 10 महीने और नौ दिन की सजा काट चुका था। उसकी दया याचिका भी राज्यपाल ने अपराध की प्रकृति को देखते हुए खारिज कर दी।
जिला जेल अधीक्षक कुंदन कुमार ने बताया कि शासन से प्राप्त आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जा रहा है और दोनों बंदियों को इस संबंध में आधिकारिक रूप से सूचना दे दी गई है।