बाराबंकी। टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने में जिला प्रभावी तरह से अग्रसर हो रहा है। दृढ़ संकल्प, नियमित जांच, इलाज और जागरूकता के जरिए ही जिले की 80 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाया गया है। जिला क्षय रोग अधिकारी की ओर से ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किए जाने के प्रस्ताव पर जनपद स्तरीय समिति ने भी ठप्पा लगा दिया है। अब यहां के प्रधानों को गांधी जयंती के अवसर पर प्रशंसी पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
वर्तमान समय में जिले में क्षय रोग के 5740 सक्रिय मरीज हैं। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त कराने की मुहिम शुरुआत की थी। इसके तहत संभावित क्षय रोगियों की जांच, टीबी नोटिफिकेशन, ट्रीटमेंट सक्सेस रेट, ड्रग सेंसबिलिटी टेस्ट रेट, निक्षय पोषण योजना व टीबी रोगियों को गोद लिए जाने के इंडीकेटर पर निगरानी शुरू हुई। 82 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित करने के लिए जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजीव टंडन ने प्रस्ताव किया। डीएम सत्येंद्र कुमार की निगरानी में जिला स्तरीय समिति ने जांच के बाद 80 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित करने की सहमति दी है। (संवाद)
विकास खंड त्रिवेदीगंज की ग्राम पंचायत कोलहदा प्रधान कंचन गुप्ता बताती हैं कि गांव के टीबी संभावित रोगियों की नियमित जांच कराकर मॉनीटरिंग कर सफलता मिली है। वहीं निंदूरा की अखईपुर की प्रधान किरन यादव बताती हैं कि टीबी रोगियों को समय पर जांच, दवा के साथ पोषण किट भी मुहैया कराई गई।
रामनगर, दरियाबाद, सिरौलीगौसपुर, बनीकोडर में दो-दो, मसौली में चार, त्रिवेदीगंज में पांच, बंकी, देवा व फतेहपुर में छह-छह, हैदरगढ़ में सात, सूरतगंज में आठ, पूरेडलई में नौ, निंदूरा में 10, सिद्धौर में 11 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुई हैं। जबकि हरख ब्लॉक में एक भी ग्राम पंचायत टीबी मुक्त घोषित नहीं हुई है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजीव टंडन बताते हैं कि बाराबंकी टीबी रैंकिंग में मंडल में प्रथम स्थान तो प्रदेश में पांचवां स्थान मिला है। सभी इंडीकेटर्स पर स्कोर 90.9 प्रतिशत है। डीपीआरओ नीतेश भोंडेले ने बताया कि इन प्रधानों को महात्मा गांधी की मूर्ति एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।