बाराबंकी। माध्यमिक विद्यालयों में खेल प्रतिभाओं को निखारने वाले मैदान अचानक गायब नहीं हुए, बल्कि विभागीय अनदेखी और बेतरतीब निर्माणों ने उन्हें धीरे-धीरे निगल लिया है। जिले के 76 माध्यमिक स्कूलों में 35 सहायता प्राप्त और 41 राजकीय की जमीनी पड़ताल में सामने आया सच हैरान करने वाला है।
एक तरफ जहां ग्रामीण क्षेत्रों के 20 में से 15 राजकीय हाईस्कूलों के पास खेल का कोई मैदान ही नहीं है, वहीं दूसरी तरफ शहरी क्षेत्र के बड़े मैदानों को सरकारी दफ्तरों, ऑडिटोरियम और छात्रावासों की भेंट चढ़ाकर खेल गतिविधियों को पूरी तरह ठप कर दिया गया है।
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मैदानों पर सरकारी कब्जा और बदहाली-
खेल का सबसे बड़ा मंच बना दफ्तर और ऑडिटोरियम
शहर के पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज के पास विशाल खेल मैदान था। इसके एक बड़े हिस्से पर पहले जिला पुस्तकालय और डीआईओएस कार्यालय तो दूसरी तरफ ऑडिटोरियम बना दिया गया।
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खेल उम्मीदों पर निर्माण की कैंची
शहर के पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के मैदान में भी विभागीय निर्माण कार्य करा दिए गए, जिससे मैदान का आकार बेहद छोटा रह गया। जो थोड़ी-बहुत जमीन बची भी है वहां बड़ी-बड़ी घास और झाड़ियां उगी हुई हैं।
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मैदान में बना दिया हॉस्टल
हैदरगढ़ के सार्वजनिक इंटर कॉलेज के पास खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए एक मुकम्मल मैदान था, लेकिन प्रबंधन और विभाग ने खेल को दरकिनार कर मैदान में छात्रावास का निर्माण करा दिया। अब यहां खेल प्रतियोगिताएं कराना मुमकिन नहीं रहा।
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छात्राओं की प्रतिभा को मिल जाए उड़ान
जैदपुर के पीएम श्री जीजीआईसी में भवनों के नए निर्माण के बाद छात्राओं के लिए नाममात्र का मैदान बचा है। स्कूल की 9 इंच की चाहरदीवारी के ठीक दूसरी तरफ नगर पंचायत का एक विशाल खेल मैदान मौजूद है।
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पुराने छात्रों का दर्द, अब तो दौड़ने की जगह भी नहीं बची-
बच्चों से छीन लिया अधिकार
हमारे समय में इस मैदान पर जिला स्तरीय क्रिकेट और एथलेटिक्स मीट होती थी। आज जब यहां डीआईओएस दफ्तर और ऑडिटोरियम देखता हूं, तो दुख होता है। बच्चों से उनका खेल का अधिकार छीन लिया गया है।
- राकेश तिवारी, पूर्व छात्र, जीआईसी
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झाड़ियों में तब्दील हो गई खेल विरासत
स्कूल के मैदान में हम पीटी और खो-खो खेला करते थे। अब वहां हुए निर्माणों और उगी हुई बड़ी-बड़ी घासों को देखकर लगता ही नहीं कि यह कभी कोई खेल का मैदान था।
- डाॅ. अजिता सुधाकर अवस्थी, पूर्व छात्रा, जीजीआईसी
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मैदान क्यों खत्म किया
मैदान के बीच में छात्रावास बनाना खेल विरोधी फैसला था। हॉस्टल कहीं और भी बन सकता था, लेकिन खेल के मैदान को खत्म कर दिया गया।
- देवेंद्र विजय सिंह, पूर्व छात्र, हैदरगढ़
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सुरक्षित हो सकता है बेटियों का खेल
जैदपुर जीजीआईसी की छात्राओं के लिए बगल में ही नगर पंचायत का बड़ा मैदान है। प्रशासन को बस एक गेट लगवाने की अनुमति देनी है, जिससे बेटियों को खेलने की सुरक्षित जगह मिल सके।
- अली गदीर रिजवी, पूर्व छात्र जीआईसी
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वर्जन
स्कूलों में खेल मैदानों की समीक्षा की जाएगी। जिन विद्यालयों के पास मैदान नहीं हैं या ग्रामीण क्षेत्रों के जिन हाईस्कूलों में जमीन की समस्या है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
- अमिता सिंह, डीआईओएस, बाराबंकी