गुरुवार को परेवा है, इस दिन महिलाएं शाम को गाय के गोबर से गोवर्द्धन पर्वत बनाती हैं और मुख्यद्वार पर गोवर्द्धन पर्वत को रखकर पूजा की जाती है। साथ ही दीपक भी जलाया जाता है। इसके बाद 56 प्रकार के व्यंजनों को बनाकर भगवान को भोग अर्पित किया जाता है। कृष्णावतार में गोकुलवासी भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते थे। इस पूजा से इंद्र देवता नाराज हो गए और उन्होंने गोकुल वासियों को आंधी, हवा, पानी आदि से परेशान कर दिया। गोकुलवासी भयभीत होकर भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का घमंड चूर करने के लिए गोवर्द्धन पर्वत अपनी एक उंगली से उठा लिया। तब इंद्र के प्रकोप से रक्षा हुई। साथ ही इंद्र का घमंड चूर हुआ। तब से दीपावली की परेवा के दिन गोवर्द्धन की पूजा की जाती है।