टिकैतनगर (बाराबंकी)। घाघरा नदी के जलस्तर में आए ठहराव के बाद कटान की रफ्तार तेज हो गई है। जिसकी वजह से एल्गिन-चरसरी तटबंध पर खतरा बढ़ गया है। नदी का पानी जिस तेजी से स्परों को काट रही है। यदि यही रफ्तार रही तो तटबंध को बचाना मुश्किल होगा। नदी से हो रही कटान को देखते हुए प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया है। बाढ़ खंड के अधिकारी कटान को रोकने में लगे हुए हैैं। मामले की जानकारी मिलते ही एडीएम और एसडीएम सिरौलीगौसपुर मौके पर पहुंचे। वहीं, दो गांव के लोगों का पलायन शुरू हो गया है। प्रशासन का दावा है कि एहतियात के तौर पर दोनों गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए फ्लड पीएसी को बुलाया गया है।
घाघरा नदी का जलस्तर भले ही ठहर गया हो, लेकिन एलिग्न-चरसरी तटबंध को बचाने के लिए बनाए गए छह स्पर (डैम्पनर) जिनकी लंबाई 90 मीटर बताई जाती है को नदी के पानी ने करीब 25 से 30 मीटर तक काट दिया है जिससे तटबंध पर खतरा मंडराने लगा है। नदी का पानी जिस तरह से कटान कर रहा है। यदि यही हाल रहा तो तटबंध को बचा पाना आसान नहीं होगा। यदि तटबंध कटता है तो परसवाल और मांझारायपुर पूरी तरह से बह जाएंगे। खतरे को देखते हुए दोनों गांवों के लोगों का पलायन शुरू हो गया है। इन दोनों गांवों के करीब साढ़े छह हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का दावा तहसील प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बचाव के लिए फ्लड पीएसी को भी बुलाया गया है कि यदि तटबंध को खतरा पहुंचता है तो पीएसी के जवानों की मदद ली जा सके। कटान की जानकारी मिलते ही सुबह से ही बाढ़ खंड के अधिकारी मौके पर पहुंच कटान को रोकने में लग गए हैं, लेकिन पानी जिस तरह से स्परों को काट रहा है उससे तटबंध को बचा पाना बाढ़ खंड के अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती है। बाढ़ से स्परों के कटान किए जाने की जानकारी जैसे ही जिला प्रशासन को मिली डीएम ने एसडीएम सिरौलीगौसपुर गरिमा स्वरूप को तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए। वहीं एडीएम भी मौके पर पहुंच गए और कटान को रोकने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए और दोनों गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भिजवाने में लगे हुए थे।
अफसरों की लापरवाही से बढ़ा खतरा
बाढ़ खंड के अधिकारियों ने स्परों को बचाने के कार्य को गंभीरता से लिया होता तो ये नौबत न आती। कटान को रोकने के लिए बनाए गए स्परों को बचाने के कार्य में भी लापरवाही बरती गई। कटान से बचाव के लिए 207 मीटर तक जियो ट्यूब में बालू भरकर लगाया जाना था, लेकिन 80 मीटर ही जियो ट्यूब लगाया गया और वह भी पश्चिम के बजाए पूर्व दिशा में लगा दिया गया। जबकि नदी का पानी पश्चिम की दिशा में तेजी से कटान कर रहा है। वहीं, बाढ़ खंड के अधिकारी धनाभाव की बात कहकर हाथ खड़े कर रहे हैं।
घाघरा नदी का पानी एल्गिन-चरसरी तटबंध के पास बंधे को बचाने के लिए बनाए गए स्परों को तेजी से काट रहा है। कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारी बराबर लगे हुए हैं। किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए फ्लड पीएसी को बुलाया गया है। एहतियात के तौर पर परसावल और मांझारायपुर गांवों को खाली कराकर यहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
- हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी