तबाही मचाने के बाद अब घाघरा का पानी स्थिर हो गया है। पर नदी अब भी खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर बह रही है। लोगों का गांवों से पलायन करना जारी है। जिन गांवों में पानी भर गया था, वहां अब संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है।
घाघरा का पानी खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.576 पर बह रहा है। नदी का पानी पिछले 24 घंटे से न तो बढ़ा और न ही घटा है। पानी स्थिर होने से बाढ़ खंड के अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, पानी घटने पर कटान का खतरा मंडराने की आशंका है।
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नदी का पानी कम होने से गांवों से भी पानी कम हुआ है। गांवों में पानी भरा होने से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। लोग वायरल फीवर की चपेट में आने लगे हैं। लेकिन यहां पर लगाई गई डॉक्टरों की टीम कहीं नजर नहीं आती है। अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरसिया का कहना है कि नदी का पानी पिछले 24 घंटे से स्थिर है।