घाघरा नदी का पानी एक बार फिर लाल निशान के पार पहुंच गया है। नदी का जलस्तर तीन सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है। पानी बढ़ता देख तराई में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन भी किसी प्रकार की स्थिति से निपटने को लेकर तैयार होने का दावा कर रहा है।
घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से ऊपर 106.116 पर बह रहा है। नदी का पानी तीन सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। जिस तरह से नदी का पानी बढ़ रहा है इसको देख तराई में हड़कंप मच गया है। लोगों का कहना है कि नदी ने एकबार फिर से तेवर तीखे कर दिए हैं। नदी का पानी एकबार पहले भी खतरे का निशान पार कर चुका है। लेकिन तब खतरे का निशान पार करने के बाद पानी स्थिर हो गया था।
लेकिन इस बार पानी स्थिर नहीं हुआ बल्कि बढ़ता ही जा रहा है। जिससे यहां के ग्रामीणों में दहशत है। यदि कहीं नेपाल से और पानी छोड़ दिया जाता है तो फिर नदी अपना विकराल रुप दिखाना शुरू कर देगी और नेपाल का ये पानी तराई में तबाही मचाना शुरू कर देगा। तराई वासी नदी के बढ़ते जलस्तर पर बराबर नजर रखे हुए हैं।
वहीं टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार नदी का पानी बढ़ने से एल्गिन-चरसड़ी बांध को लेकर जो खतरा बना हुआ था वह कम हो गया है। क्योंकि जब नदी का पानी बढ़ता है तो कटान नहीं होती है। इससे बांध की मरम्मत में लगे अधिकारियों ने राहत की सांस ली है और क्षतिग्रस्त हुए बंधे की मरम्मत तेजी से कराई जा रही है।
बाढ़ खंड के अधिकारियों ने इस बार बांध को बचाने के लिए एक रिंग बांध भी बनाया गया है। वहीं नदी के जलस्तर को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है।
घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने को कहा गया है। नदी के जलस्तर पर बराबर नजर रखी जा रही है।
- हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी