कोटवाधाम। सरयू का जलस्तर घटने और बहाव कम होने के बावजूद कटान थम नहीं रहा है। पिछले चार दिनों में 40 बीघा से अधिक जमीन नदी में समा चुकी है। डेढ़ माह से जारी कटान में अब तक 300 बीघा से ज्यादा उपजाऊ भूमि नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। खेतों के बाद अब नदी का रुख आबादी की ओर होने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के घुटरू, कोठीडीहा और सिरौलीगुंग गांवों में कटान जारी है। किसानों को खेतों में खड़ी फसल काटने का मौका भी नहीं मिल पा रहा है।
कोठीडीहा गांव के किसान जितेंद्र बहादुर सिंह, अनूप सिंह और नितिन सिंह ने बताया कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि कटान का जायजा लेने आते हैं, लेकिन जमीन बचाने के लिए कोई प्रबंध नहीं किया जा रहा है। सिरौलीगुंग के किसान रिंकू सिंह, गोविंद और मंशाराम ने कहा कि अब आबादी पर खतरा मंडरा रहा है। घुटरू गांव के किसान रजपाल, हरिनाम यादव और कृपाल के अनुसार, नदी किनारे तेजी से कटान कर रही है। किसानों को डर है कि जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो नदी उनकी जमीन निगलती रहेगी। ग्रामीणों का आरोप है कि निरीक्षण के बावजूद कटान रोकने के लिए ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं।
अधिकारियों ने किया निरीक्षण, धारा की स्थिति देखी
कटान की गंभीरता को देखते हुए अयोध्या के एकादशम मंडल के सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता डीसी वर्मा ने अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड शशिकांत सिंह के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने घुटरू, कोठीडीहा और सिरौलीगुंग गांवों में कटान का जायजा लिया। उन्होंने करीब चार किलोमीटर तक नाव से नदी में भ्रमण कर कटान और धारा की स्थिति देखी। इसके बाद कटान रोकने और आबादी की ओर मुड़ रही नदी की धारा को सीधा करने के लिए नक्शा तैयार किया गया। अधीक्षण अभियंता डीसी वर्मा ने बताया कि प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह ने कहा कि जल्द ही इस दिशा में कार्य शुरू कराया जाएगा।