बाराबंकी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 55 जोड़ों में सुलह-समझौता कराया गया। गिले-शिकवे भुलाकर दंपती साथ गए। जिला जज प्रतिमा श्रीवास्तव सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों के सामने पति-पत्नी ने एक दूसरे को माला भी पहनाई। लोक अदालत में एक लाख 98 हजार 406 मामलों का निस्तारण किया गया। 38 करोड़ 46 लाख 44 हजार 664 रुपये अर्थदंड व प्रतिकर भी जमा कराया गया।
फैमिली कोर्ट के निस्तारित मामलों में कुछ तो आठ-दस साल से लंबित चल रहे थे। लखनऊ के एक दंपती का मामला आठ साल से चल रहा था। पत्नी ने गुजारा भत्ते की रिपोर्ट दर्ज करा रखी थी। काउंसलिंग में बातचीत के जरिए दोनों एक साथ रहने को राजी हुए। वहीं, एक अन्य मामले में पांच साल से दंपती परिवार के अन्य सदस्यों के बेजा हस्तक्षेप के कारण अलग हो गए थे। मामला तलाक तक पहुंच गया था, लेकिन कोर्ट ने दोनों को बातचीत का अवसर दिया और बात बन गई। इसी तरह अन्य मामलों में भी दंतपी पुरानी बातें और रंज भूलकर साथ गए।
इससे पहले जिला जज प्रतिमा श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुए राष्ट्रीय लोक अदालत के मुख्य अतिथि के तौर पर प्रशासनिक न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने मां सरस्वती के फोटो पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि संवाद, संवेदनशीलता और सहमति ही लोक अदालत की आत्मा हैं। उन्होंने कहा विवाद नहीं, समाधान हमारा लक्ष्य हो, टकराव नहीं, समन्वय हमारा मार्ग हो। न्यायमूर्ति ने सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं संबंधित विभागों से आह्वान किया कि वे मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पक्षकारों के बीच विश्वास का सेतु बनें, ताकि अधिक से अधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण एवं स्थायी समाधान संभव हो सके।
फैमिली कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश वंदना सिंह, अपर प्रधान न्यायाधीश कृष्ण कुमार, अपर प्रधान न्यायाधीश सत्येंद्र प्रकाश पांडेय, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण अल्पना सक्सेना, अपर जिला जज राकेश कुमार सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्रीकृष्ण चंद्र सिंह, एडीएम न्यायिक राजकुमार, एसपी विकास चंद्र त्रिपाठी, जिला बार अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार वर्मा,महामंत्री रामराज यादव, एलडीएम सौरभ मौर्या आदि साथ रहे।