लखनऊ, बाराबंकी। बाराबंकी स्थित श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी के बाहर विरोध में प्रदर्शन कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज के मामले में वाले चार पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया है। निलंबित होने वालों में चौकी इंचार्ज, दो मुख्य आरक्षी और एक सिपाही शामिल है। इस प्रकरण की जांच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आईजी रेंज अयोध्या प्रवीण कुमार को सौंपी गई थी। उन्होंने अपनी अंतरिम रिपोर्ट बुधवार रात डीजीपी राजीव कृष्ण को सौंप दी थी। आईजी की संस्तुति पर एसपी बाराबंकी ने दोषी पाए पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है।
सूत्रों के मुताबिक आईजी रेंज ने लाठीचार्ज की घटना की वीडियो फुटेज में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसाने वाले चौकी इंजार्च गजेंद्र विक्रम सिंह, मुख्य आरक्षी पवन यादव, सौरभ सिंह और सिपाही विनोद यादव को दोषी पाते हुए निलंबित करने की संस्तुति की थी। इस मामले में सीओ सिटी हर्षित चौहान और इंस्पेक्टर बाराबंकी कोतवाली आरके राणा की भूमिका की जांच भी की जा रही है। जांच पूरी करने के बाद आईजी रेंज अंतिम रिपोर्ट मुख्यालय को सौपेंगे। जांच के दौरान टीम ने केजीएमयू में भर्ती घायलों से मुलाकात कर उनके बयान भी दर्ज किए।
विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज की घटना के बाद मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए सीओ को हटाने का आदेश दिया था, जबकि इंस्पेक्टर और चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया गया था। विश्वविद्यालय द्वारा बिना मान्यता एलएलबी कोर्स संचालित करने के प्रकरण की जांच मंडलायुक्त अयोध्या को सौंपी गई थी। बीते बुधवार की देर रात मंडलायुक्त और आईजी रेंज अयोध्या की जांच रिपोर्ट के बाद ही विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ बाराबंकी कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
छात्रों को भड़काने वाले भी हो रहे चिह्नित
बाराबंकी। कमिश्नर और आईजी की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के बाद अब छात्रों को भड़काने और उन पर हमला करने वालों की भी पहचान की जा रही है। सीसीटीवी रिकार्डिग में ऐसे तीन-चार लोग नजर आए हैं, जो न तो पुलिसकर्मी हैं और न ही यूनिवर्सिटी प्रशासन से जुड़े कर्मचारी। यह लोग कौन हैं और वहां क्या कर रहे थे, इसकी अलग से गहन जांच हो रही है।
यूनिवर्सिटी परिसर में दर्ज अवैध कब्जेदारी के मुकदमे की जांच भी शुरू हो गई है। साथ ही प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी पत्रावलियां भी जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन से मांगी गई हैं। बताया कि अभी तक इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई भी तहरीर नहीं दी गई है।
अर्पित विजयवर्गीय, एसपी