देवा तिराहा स्थित जिला सैनिक कल्याण एंव पुनर्वास कार्यालय।
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भारत-पाक व कारगिल युद्ध में भले ही सैनिकों ने विजय हासिल की हो, पर अपने हक व सुविधाओं की लड़ाई आज भी सैनिक लड़ रहे हैं। सैनिकों को राज्य सैनिक परिषद, पुनर्वास निधि, विजय फंड व निदेशालय से तमाम सुविधाएं मिलनी चाहिए पर सरकार व अधिकारियों की उपेक्षा सैनिकों पर भारी पड़ रही है। यहां तक पुनर्वास कार्यालय में सैनिकों की पूर्ण जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।
सेना से रिटायर्ड हो चुके फौजियों के पुनर्वास के लिए सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र बना है। केंद्र पर तैनात अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते पूर्व सैनिक व्यवस्था से लड़ रहे हैं। विशुनपुर निवासी पूर्व सैनिक तेजपाल सिंह बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन का एरियर बैंक द्वारा सही नहीं किया जा रहा है।
बैंक मैनेजर, एलडीएम व जिलाधिकारी से शिकायत की पर आज तक सुधार नहीं हो सका। वहीं आनंद नगर निवासी सूबेदार मेजर शिवलाल सिंह भी बैंक के अधिकारियों से त्रस्त होने की बात कह रहे हैं।
उनका कहना है कि ज्यादातर सैनिकों को पुनर्वास, पेंशन, राशन, शस्त्र लाइसेंस, आरक्षण समेत कई सुविधाओं के लिए कई दिनों तक चक्कर काटना पड़ता है। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र में 2481 पूर्व सैनिकों के पंजीकरण का डाटा है जिसमें से राज्य सरकार की 11, केंद्र सरकार की दो व निजी क्षेत्र में 16 सैनिकों का पुनर्वास कराने की बात कही जा रही है।