बाराबंकी। इंडियन बैंक की नाका सतरिख शाखा के तत्कालीन प्रबंधक पर ओटीएस (वन टाइम सेटलमेंट) की रकम में हेराफेरी और गबन का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ितों का दावा है कि लाखों रुपये जमा कराने के बावजूद ऋण खाते बंद नहीं हुए और जारी किए गए नो-ड्यूज प्रमाणपत्र भी फर्जी निकले। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और बैंक प्रबंधन से की गई है।
जानकारी के अनुसार, इन्धौलिया सराय के राम मनोज ने ओटीएस के तहत पांच लाख रुपये जमा किए, पर रिकॉर्ड में सिर्फ दो लाख दर्ज हुए। चिलौकी के राजेंद्र प्रसाद ने 1.60 लाख रुपये जमा किए, लेकिन खाते में मात्र 60 हजार रुपये दिखे। वहीं, टेरा निवासी शीन्नू के दिवंगत पिता के खाते से 90 हजार रुपये लिए गए, पर केवल 55 हजार ही जमा मिले। इन दोनों मामलों में फर्जी नो-ड्यूज भी थमा दिया गया। इसके अलावा पूर्व बैंक मित्र लवकुश वर्मा ने भी प्रबंधक पर पद का दुरुपयोग कर लाखों रुपये उधार लेने व क्यूआर कोड से ट्रांसफर कराने का आरोप लगाया है। पीड़ितों ने साक्ष्यों के साथ निष्पक्ष जांच की मांग की है।