देवा महोत्सव के ऑडिटोरियम में आज की शाम लोक व सूफी गायन के नाम रही। आकाशवाणी व दूरदर्शन के कलाकारों ने अपनी गायकी का ऐसा जलवा बिखेरा कि लोग मंत्रमुग्ध हो गए। एक के बाद एक सूफी व लोक गीतों की ऐसी झड़ी लगी कि लोग झूम उठे। बाद में कलाकारों को अपर जिलाधिकारी ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
देवा महोत्सव के ऑडिटोरियम में आज की शाम की शुरुआत लोक गायिका यामिनी कामिनी के लोक भजनों से हुई। उन्होंने पूर्वी विधा का गीत तोहरे करनवा न हो सजनवा.. से अपने कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके पश्चात उन्होंने फोग झूमर विधा का गीत रंगीला मोरा बालमा.. गाकर लोगों को झुमा दिया। दोनों आकाशवाणी व दूरदर्शन कलाकारों ने सूफी गीत दीवाना तेरा आया बाबा तेरी नगरी में गाकर खूब वाह वाही लूटी।
इसके पश्चात बनारस घराने की सूफी गायिका मंजूषा मिश्रा ने अपना परफार्मेंस पेश किया। उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत नियत कोई जोगी आवे.. से की। इसके पश्चात उन्होंने छाप तिलक सब छीनी तोसे नैना मिला के.. गाकर समा बांध दिया। इसके बाद सूफी गीत ई शाने करम का क्या कहना व तू माने या न माने तथा पैरोडी सॉन्ग सांसों की माला में से, कितना सोना तुझे रब ने बनाया जी करे देखता रहूं ..गाकर धूम मचा दी।
इसके बाद उन्होंने मेनू चढ़ गया रुप दा जहर प्यार दी विन सुना जा रे.. जाकर धूम मचा दी। इस मौके पर अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार सिंहए मंच प्रभारी देवानंद श्रीवास्तव, ऑडिटोरियम सुरक्षा प्रभारी राय सिंह यादव, मेला सुपरवाइजर इक्तेदार अहमद शक्कू आदि मौजूद रहे।