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80 गांवों में भरा बाढ़ का पानी

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बाराबंकी सूरतगंज ब्लॉक क्षेत्र के हेतमापुर के निकट सरयू नदी की बाढ़ के बाद नाव से बंधे की ओर जाते ? - फोटो : BARABANKI
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गनेशपुर/कोटवाधाम/सूरतगंज (बाराबंकी)। बैराजों से सरयू नदी में छोड़े गए नेपाली पानी से रविवार को जिले की तीन तहसीलों के 80 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन सभी गांवों में पानी भर गया है। इससे इन गांवों की करीब सवा लाख आबादी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से इनका संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। बाढ़ पीड़ित नावों के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं।
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तराई में चारों और पानी ही पानी नजर आ रहा है, जिससे बाढ़ पीड़ितों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। बारिश और बाढ़ के चलते पीड़ितों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तीनों तहसीलों के एसडीएम के साथ फ्लड पीएसी को लगाया है जो बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद कर रही है।
एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार बैराजों से सरयू नदी में छोड़ा गया नेपाली पानी रविवार को खतरे के निशान से 58 सेमी. ऊपर पहुंच गया है। इसके साथ ही नदी का जलस्तर एक सेमी. प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
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नदी का जलस्तर अभी और बढ़ेगा, इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है। सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के टेपरा, कहारनपुरवा, सनावा, मनीराम पुरवा, विहड़, मड़हा पुरवा, परसा, सिरौलीगुंग, कोठीडीहा, सरदाहा, घुटरू, भयकपुरवा, बघौली पुरवा, सरायसुर्जन, भैरवकोल, गोबरहा, तेलवारी, पर्वतपुर, करौनी, इटहुआ, नव्वनपुरवा, मंझारायपुर, परसवाल, बेहटा, ढेकवा माफी समेत 35 गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
इन गांवों के रास्तों पर पानी भर जाने से गांव को आने-जाने का रास्ता बंद हो गया है। लोग नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं। वहीं, रामनगर तहसील क्षेत्र के दुर्गापुर, लहडरा, कंचनापुर, पूरनपुर, राईकुरवा, जमका, फाजिलपुर, केदारीपुर, आबादी, बेलहारी, बबुरी, खुज्जी, बतनेरा, उधिया, हेतमापुर, बलईपुर, बस्ती, बाबापुरवा, ललपुरवा, कोडरी, सुंदर नगर, अकौना, कोयलीपुरवा, मदरहा, सकतापुर, गडरियन पुरवा, पर्वतपुर, सुमिरन पुरवा, बिझला, ठाकुर पुरवा, गायघाट, माधव पुरवा, बल्लोपुर, तेराईन पुरवा समेत करीब 35 गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है।
इसके अलावा रामसनेहीघाट तहसील के नैपुरा, बसंतपुर, सुबेदारपुरवा, उमरहा, अतरसुइयां, गौरी पुरवा, कलहंस पुरवा समेत 10 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन गांवों की करीब सवा लाख आबादी पर परिवार को सुरक्षित रखने का संकट मंडराने लगा है। इन गांवों में बने स्कूल और अस्पताल भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। संपर्क मार्गों पर पानी बहने के कारण लोग परिजनों को नावों के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हुए हैं। वहीं फ्लड पीएसी भी बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रही है।
कटान तेज देख भागे अधिकारी
पर्वतपुर, तेलवारी गांव के निकट हो रही तेज कटान में अभी तक कई मकान नदी में समा चुके हैं, लेकिन कटान अभी रुकी नहीं है। सरयू नदी का पानी बढ़ने के साथ कटान और तेज हो गई है। यह देख कटान रोकने में लगे बाढ़ खंड के अधिकारी भाग खड़े हुए हैं। जबकि इन गांवों में करीब एक दर्जन घर कटान के मुहाने पर हैं। उसके बाद भी अधिकारियों की ओर से लापरवाही बरती जा रही है।
बांध को कमजोर कर रहे रेनकट
जलस्तर बढ़ने के साथ ही अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर जगह-जगह फिर बड़े-बड़े रेनकट हो गए हैं, जो बांध को कमजोर कर देते हैं। इससे बाढ़ के दौरान बांध के कटने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इन रेनकटों को सही करने के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बजट जारी होता है, इसके बाद भी रेनकट की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आरोप है कि रेनकट सही कराने के नाम पर मिट्टी की पटाई और घास की सफाई कराकर पैसा निकाल लिया जाता है।
बाढ़ क्षेत्र में रखी जा रही नजर
सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 58 सेमी. ऊपर पहुंच गया है। इससे तराई के काफी गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। तीनों तहसीलों के एसडीएम के साथ ही फ्लड पीएसी को बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगाया गया है। बाढ़ क्षेत्र में बराबर नजर रखी जा रही है। बाढ़ पीड़ितों यथासंभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
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- राकेश कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी
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