घाघरा नदी का पानी भले ही स्थिर हो गया हो लेकिन नेपाल ने फिर ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया है जिससे सोमवार से तराई के हालात फिर बिगड़ सकते हैं। वहीं नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से 53 सेमी ऊपर बह रहा है। वहीं तीन दर्जन से अधिक गांवों में अभी भी पानी भरा हुआ है जिससे संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ने लगा है। वहीं बंधे पर बसे बाढ़ पीड़ित परेशानियों से जूझ रहे हैं।
खाना, पानी, चारे से लेकर अन्य प्रकार दिक्कतों से बाढ़ पीड़ित जूझ रहे हैं। लेकिन इनकी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है।
नेपाली पानी फिर से तराई में तबाही मचाएगा इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। वहीं जो लोग बंधे पर बसे हैं उन्हें तमाम प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं जो लोग अभी भी गांवों में फंसे हैं उनके सामने भी समस्याएं मुंह बाए खड़ी है। रविवार को हेतमापुर बंधे पर बसे कंचनापुर के बाढ़ पीड़ित नाव से गांवों को आते जाते देखे गए। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि खाने पीने का कुछ सामान सुरक्षित रख दिया गया था जिसे लेने के लिए गांव गए थे।
घाघरा नदी में नेपाल द्वारा ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी सोमवार तक तराई में पहुंच जाएगा। वहीं बाढ़ पीड़ितों पर बराबर नजर रखी जा रही है। रविवार को नैपुरा, कमियार और परसावल के बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री का वितरण कराया गया।