घाघरा नदी खतरे के निशान से 85 सेमी ऊपर पहुंच कर स्थिर हो गई थी लेकिन नेपाल द्वारा फिर 2.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी अब खतरे के निशान से 80 सेमी ऊपर बह रहा है। मंगलवार को नदी की कटान में आकर करीब एक दर्जन घर पानी के तेज बहाव में बह गए। बाढ़ के पानी की चपेट में आकर करीब 45 सौ बीघे फसल बर्बाद हो गई है। वहीं तराई के हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। बाढ़ पीड़ित दो वक्त की रोटी और मवेशियों के चारे के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
रामनगर तहसील में कंचनापुर गांव के पास घाघरा का पानी काफी तेजी से कटान कर रहा है। कटान की चपेट में आकर इसी गांव के निवासी मो.फारूख, मो.कलाम, मो.रफीक, मो.जुबेर, अब्दुल, मुकीर, नूरहसन, मुनीर, मो.वारिस, सिराज, इदरीस, नियाज के मकान मंगलवार को नदी की धारा में समा गए। नदी के तेवर देख जो लोग गांव में छतों पर ठहरे हुए थे वह भी गांव के बाहर सुरक्षित स्थानों के लिए निकल रहे हैं।
इसके अलावा तपेसिपाह, लहड़रा, दुर्गापुर आदि गांवों में पानी भर जाने की वजह से यहां के लोगों के सामने भी दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। तराई के हालात सुधर नहीं रहे हैं और बाढ़ पीड़ितों के सामने दो वक्त की रोटी और मवेशियों के लिए चारा जुटाना काफी मुश्किल होता जा रहा है।