बाराबंकी। नेपाल से पानी छोड़े जाने से उफनाई सरयू तराई में फिर से तबाही मचाने लगी है। नदी का जलस्तर बढ़ने से तराई के करीब 40 गांव दोबारा बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। गांवों में पानी पहुंचने की वजह से लोग सुरक्षित स्थानों के लिए निकल पड़े हैं। तेलवारी मार्ग बह जाने से गांव का संपर्क दूसरे इलाकों से टूट गया। ग्रामीणों का वहां से निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ क्षेत्र में तैनात राजस्व कर्मियों को सतर्क रहने के आदेश दिए हैं। इस बीच मंगलवार को नेपाल से फिर पौने चार लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़े जाने से तराई के हालात और बिगड़गे की आशंका है।
गनेशपुर एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार मंगलवार को सरयू नदी का पानी खतरे के निशान से 70 सेमी. ऊपर पहुुंच गया। इसके साथ ही जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी है। इससे बुधवार तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 85 सेमी. ऊपर तक पहुंचने का अनुमान है। नदी उफनाने से तराई के कोरियनपुरवा, तपेसिपाह, दुर्गापुर लहड़रा तथा सूरतगंज क्षेत्र के कंचनापुर, सुंदरनगर, कोड़री, बेलहरी, कोयली पुरवा, सरसंडा, ललपुरवा, पर्वतपुर, मदरहा, गायघाट व बतनेरा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन गांवों के लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में निकलने लगे हैं। कोटवाधाम क्षेत्र के सनावा, कहारनपुरवा, सिरौलीगुंग, कोठीडीहा, परसा, घुंटरू, सरदहा, टेपरा, बघौलीपुरवा, सरयसुर्जन, गोबरहा, तेलवारी, इटहुआ पूरब, बबुरी परसावल, पारा, बेहटा, नव्वनपुरवा समेत तराई 40 गांवों तक नदी का पानी पहुंचने से तराई में एक बार फिर हड़कंप मच गया है।
तेलवारी मार्ग बहा, पीएचसी में भरा पानी
बाढ़ के पनी से तेलवारी गांव का मार्ग बह गया है। इसके साथ गोबरहा स्थित नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और तेलवारी स्थित प्राथमिक विद्यालय में बाढ़ का पानी भर गया है। इन गांवों में पानी भरने के बाद भी प्रशासन की ओर से अभी तक नाव की व्यवस्था नहीं की गई। इससे ग्रामीणों को पैदल ही गहरे पानी के बीच से निकलना पड़ रहा है।