बाराबंकी। घाघरा की बाढ़ से तराई की करीब 30 हजार आबादी परेशान है। 40 गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर गए हैं। इन गांवों के लोगों का बाहर निकल पाना मुश्किल हो गया है। पर्याप्त नावें उपलब्ध न होने के चलते बहुत से लोग टापू बने गांवों में फंसे हैं। प्रशासनिक इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
एलिग्न ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के मुताबिक शुक्रवार को नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 मीटर से 39 सेमी. ऊपर (106.466 मीटर) बह रहा था। गुरुवार रात में जलस्तर 106.566 मीटर पर पहुंच गया था। शुक्रवार को जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की लेकिन तराई के लोगों की मुसीबतें लगातार बढ़ रही हैं। तराई के टेपरा, सरायं सुरजन, बधौली पुरवा, तेलवारी, भयक पुरवा, सनावा, सिरौलीगुंग, कोठी डीहा, परसा, सरहा, बीहड़, गोबरहा, घुटरु, कोडवा, परसावल, नव्वनपुरवा, मांझारायपुर, रामनगर के उदईपुरवा, लहडरा, तपेसिपाह, कोरियनपुरवा तथा सूरतगंज क्षेत्र के बतनेरा, कोडरी, सुंदरनगर, बेलहरी, ललईपुर, मदरहा, कोइली पुरवा, गडरियन पुरवा, सांई तकिया, हरिजन कुटी, कांशीराम पुरवा समेत 40 गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है।
इन गांवों की करीब 30 हजार आबादी बेघर हो गई है। बहुत से ग्रामीण नजदीक के तटबंध व अन्य स्थान पर डेरा डाले हुए हैं। काफी संख्या में लोग अभी भी गांवों में फंसे हैं। पर्याप्त संख्या में नावें न मिल पाने की वजह से ग्रामीण बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इस बीच शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित गिदरापुर, भैरवकोल, सरायं सुरजन व तेलवारी में विधायक सतीश शर्मा ने राहत सामग्री का वितरण किया। विधायक ने भोजन, पेयजल व दवाई के इंतजाम कराने के निर्देश तहसील प्रशासन को दिए गए हैं। इस मौके पर तहसीलदार अखिलेश कुमार सिंह व अन्य लोग भी मौजूद रहे।