बाराबंकी। नेपाल से छोड़े जा रहे पानी के चलते उफनाई घाघरा तराई के लोगों की मुसीबत लगातार बढ़ा रही है। शुक्रवार को सात गांवों को जोड़ने वाले मार्ग नदी की धारा में बह गए हैं। ये गांव टापू बन गए हैं। इससे ग्रामीणों को बाहर निकलने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस बीच 73 परिवारों में तिरपाल उपलब्ध कराए गए।
बाढ़ कंट्रोल रूम के मुताबिक घाघरा का पानी एल्गिन चरसड़ी बांध पर खतरे के निशान 106.076 मीटर से ऊपर 106.226 मीटर पर पहुंच गया है। नदी का पानी देर रात से फिर बढ़ने लगेगा। इससे कंचनापुर, हेतमापुर आदि गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ प्रभावित टेपरा, बंधौली पुरवा, गोसुवापुर, गोबरहा, सरायं सुरजन, भौलीकोल और सनावां जाने वाले मार्ग बह गए हैं। ये गांव टापू बन गए हैं। इससे लोग बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए निजी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से कोई मदद मुहैया नहीं कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार को नेपाल द्वारा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद हालात और बिगड़ रहे हैं। इस बीच एसडीएम रानगर सीपी पाठक ने कंचनापुर गांव पहुंचकर लोगों को हाल जाना। उधर डीएम के निर्देश पर बांध पर रह रहे 73 परिवारों को राजस्व निरीक्षक ने तिरपाल दिए।
तटबंध पर चलेगा अस्पताल
नदी का पानी शुक्रवार को गोबरहा गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर गया। चिकित्सक व कर्मचारी दवाएं और अन्य सामान लेकर तटबंध पर जा पहुंचे। कर्मचारियों का कहना है कि अब तटबंध पर अस्पताल चलेगा।
घाघरा नदी का पानी तराई के 13 गांवों में पहुंच गया है। इनमें सात गांवों का संपर्क पूरी तरह से दूसरे गांवों से टूट गया है। ग्रामीणों को नावों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। तटबंध पर रह रहे 73 परिवारों को तिरपाल दिए गए हैं। बिजली और जनरेटर की भी व्यवस्था कराई गई है।
-संदीप गुप्ता, एडीएम