बाराबंकी। घाघरा का जलस्तर कम होने के बाद तेज हुई कटान में टेपरा का मार्ग भी बह गया। इससे गांव का संपर्क दूसरे इलाके से टूट गया है। बचे घरों के घाघरा की धारा में समाने के खतरे से डरे लोगों ने गांव खाली कर दिया है। गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ लोग दीवारें तोड़कर ईंटें तक ले जाने की कोशिश में जुटे हैं। कई परिवारों ने अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर आशियाना बना लिया है।
घाघरा की कटान में टेपरा गांव के आठ मकान, एक मंदिर और सैकड़ों बीघा खेत समा चुके हैं। कटान तेज होने से पूरा गांव ही नदी के निशाने पर आ गया है। मंगलवार को गांव को जोड़ने वाला मार्ग भी नदी में बह गया। इससे ग्रामीणों के दूसरे इलाके में पहुंचने के लिए रास्ता नहीं बचा है। कटान लगातार तेज होने से डरे ग्रामीण गांव खाली कर रहे हैं। अधिकांश ग्रामीणों ने बंधे पर आशियाना बना लिए हैं। गांव के जगदीश, लल्लन, देशराज आदि का कहना है कि कटान की गति को देखते हुए अब गांव का बच पाना संभव नहीं लगता है।
इसके बावजूद प्रशासन कटान को रोकने के ठोस प्रयास नहीं किए। ग्रामीणों का आरोप है कि कटान शुरू होने के बाद उसे रोकने के लिए कटर बनाने का कार्य शुरू कराया। अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर रह रहे प्रसादी, लल्लन, देवी दयाल, जगदीश आदि का कहना है कि उनके साथ अधिकांश लोगों ने गांव खाली कर दिया। हालात को देखते हुए गांव का बच पाना आसान नहीं लग रहा है।
घाघरा नदी का पानी टेपरा गांव के निकट तेजी से कटान कर रहा है। बाढ़ खंड के अधिकारी कटान रोकने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद मंगलवार को गांव का संपर्क मार्ग बह जाने से स्थिति और बिगड़ गई है। पूरा गांव खाली करा दिया गया है। प्रभावित लोगों को मदद पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
संदीप गुप्ता, एडीएम