डायलिसिस यूनिट में नहीं चली तीन से सात बजे वाली शिफ्ट
मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन में मचा है हड़कंप
संवाद न्यूज एजेंसी
बाराबंकी। जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में गत दिवस हुई एक मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मचा है। इसका असर यूनिट के संचालन पर दिखाई पड़ रहा है। यहां प्रतिदिन तीन शिफ्ट में 21 मरीजों की डायलिसिस की जाती है लेकिन बुधवार को मात्र दो शिफ्ट में 16 मरीजों की ही डायलिसिस की गई। पांच मरीजों को ऐसे ही वापस कर दिया गया।
निजी अस्पतालों में डायलिसिस कराने के लिए तीन से पांच हजार रुपये तक का खर्च आता है। ऐसे में दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से जिला अस्पताल में निशुल्क डायलिसिस कराने आए मरीजों को जब लौटना पड़ा तो काफी परेशानी हुई। इसके साथ ही नए मरीजों को भी डायलिसिस के लिए अनुमति नहीं दी गई। यूनिट के स्टाफ में भी इसके संचालन को लेकर संशय बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को डायलिसिस के दौरान ख्वाजापुर गांव निवासी गंगाराम (62) की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद यूनिट के स्टाफ ने उन्हें आननफानन इमरजेंसी रेफर कर दिया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। बताते हैं कि यूनिट का संचालन नर्स और टेक्नीशियन के सहारे किया जाता है। यहां किसी अनुभवी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। ऐसे में लापरवाही के चलते मरीज की जान चली गई।
18 अगस्त 2022 को जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट का संचालन शुरू किया गया था। इसका टेंडर कोलकाता की एस्काग संजीवनी को दिया गया था। वर्तमान में यहां सात मशीनें लगी हुई हैं और तीन शिफ्ट में इसका संचालन किया जाता है। पहली शिफ्ट सुबह छह बजे से 10 बजे तक, दूसरी 10:30 से 2:30 बजे तक और तीसरी शिफ्ट तीन से सात बजे तक चलती है।
अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में ही डायलिसिस करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के चलते एक शिफ्ट बंद कर पांच मरीजों को लौटाया गया है और नए मरीजों को भी अनुमति नहीं दी गई है। सीएमएस के छुट्टी से वापस आने के बाद उनके निर्देश पर मौत के मामले की जांच कराएंगे। - प्रभारी सीएमएस, डॉ.राजेश कुशवाहा