रामनगर। भगवान शिव की नगरी लोधेश्वर महादेवा में शनिवार को अवैध कब्जों पर कार्रवाई हुई। डीएम शशांक त्रिपाठी के आदेश पर बनी संयुक्त टीम ने पांच थानों के पुलिस बल व पीएसी की मौजूदगी में चार घंटे तक पांच बुलडोजर चलवाकर रियाज कॉम्पलेक्स समेत 15 दुकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान सरकारी ड्रोन हर गतिविधि कैमरे में कैद करते रहे। शाम साढ़े सात बजे कार्रवाई अगले दिन के लिए रोक दी गई।
सीएम योगी आदित्यनाथ के महादेवा कॉरिडोर के लिए मंदिर के मुख्य मार्ग को 16 मीटर चौड़ा किया जाना है। इस हिस्से में बने 17 व्यावसायिक भवनों का अधिग्रहण होना था। इनमें से 15 दुकानों का निर्माण शिवार्चन तालाब की जमीन पर मिला था।
मार्च-2025 में एसडीएम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, लेकिन दीन मोहम्मद, रियाज, इसरार, आदित्य तिवारी और वीरेंद्र तिवारी ने सिविल कोर्ट में वाद दायर कर दिया था। शुक्रवार को अपर जिला न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश शुक्ल ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद डीएम शशांक त्रिपाठी ने आदेश का अनुपालन कराने के निर्देश दिए। आनन-फानन में टीम गठित हुई। सुबह करीब 10 बजे रामनगर, मसौली, फतेहपुर, जहांगीराबाद और मोहम्मदपुर खाला थानों की पुलिस बुला ली गई। हेलमेट लगाए पुलिसकर्मी सुरक्षा उपकरणों से लैस थे। लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों के साथ राजस्व कर्मियों ने सड़क नापना शुरू कर दिया। पौने दो बजे नापजोख पूरी कर पहले तीन और फिर दो बुलडोजर मंगा लिए गए। करीब तीन बजे कार्रवाई शुरू हुई। जेसीबी की आवाज गूंजी तो दुकान मालिकों में अफरातफरी मच गई। कई लोग जल्दी-जल्दी अपना सामान निकालने लगे। सबसे पहले रियाज कॉम्पलेक्स पर बुलडोजर चला। उसके बाद एक-एक कर दुकानें गिरने लगीं। पूरा अभियान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम रामनगर गुंजिता अग्रवाल की देखरेख में हुआ। उनके साथ एसडीएम फतेहपुर कार्तिकेय सिंह, तहसीलदार विपुल सिंह, सीओ गरिमा पंत और सीओ जगत कनौजिया भी मौजूद रहे।
वर्जन-
कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन द्वारा अवैध निर्माणों को हटाया गया है। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण और नियमानुसार रही। अब महादेवा कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
- गुंजिता अग्रवाल, एसडीएम
लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया
कार्रवाई को देखने के लिए सुबह से ही मंदिर क्षेत्र में हजारों लोग जुट गए थे। कुछ लोग इसे विकास की दिशा में बड़ा कदम बता रहे थे, तो कुछ अपनी टूटी दुकानों को देखकर दुखी थे। चार घंटे बाद जब बुलडोजर रुके तो धूल और मलबे के बीच सब कुछ बदल चुका था। तालाब की जमीन अब खाली थी, और कॉरिडोर के सपने की नई शुरुआत हो चुकी थी।