झमाझम बारिश के बीच सावन के पहले सोमवार को महादेवानगरी शिवमय हो गई। भोर से ही शिवालयों के कपाट खुले तो हाथों में गंगाजल, पूजन सामग्री लिए शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। दूध, दही, घी, गंगाजल से बाबा का अभिषेक कर भक्तों ने मंगलकामना की। भोर से ही भक्तों का रेला बढ़ गया। भीड़ व धक्कामुक्की के चलते लोधेश्वर महादेवा में बैरीकेडिंग टूट गई। शिवालय सुबह से देररात तक हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयघोषों से गूंजते रहे। रात में आरती के पूर्व बाबा का भव्य श्रंगार हुआ।
सावन के पहले सोमवार को नीलकंठ के जयकारों से लोधेश्वर महादेवा गूंज उठा। जिले के विभिन्न शिवालयों में सुबह से लेकर शाम तक रुद्राभिषेक व जलाभिषेक होता रहा। हर-हर महादेव व बम-बम भोले के जयकारों से पूरा महादेवा परिसर गूंज उठा। जैसे ही मंदिर का मुख्य द्वार खोला गया, नीलकंठ के जयकारे लगाते श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक शुरू कर दिया। सुबह हुई बारिश के बावजूद शिव दर्शन के लिए मंदिर के बाहर लंबी लाइन लगी रही। लोधेश्वर महादेवा में भीड़ इतनी बढ़ गई कि बैरीकेडिंग टूट गई जो जैसे तैसे दुरुस्त की गई। अव्यवस्थाओं पर शिवभक्तों की आस्था भारी दिखी।
साफ-सफाई के प्रबंध और बिजली को तरसे
मेला परिसर में जगह-जगह रास्तों में कीचड़ व गंदगी फैली रही। इसके अलावा बिजली की आंख मिचौली से श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई बार बिजली गुल होने से श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी हुई। मंदिर निकास द्वार से तालाब की ओर जाने वाले रास्ते पर विद्युत खंभों पर लगी लाईटें खराब पड़ी रही।