बाराबंकी। जिले के किसान टमाटर की फसल खेत में जोतने को किसान विवश हो रहे हैं। बाजार में टमाटर इतना सस्ता है कि किसानों की इसे तोड़वाने की मजदूरी तक नहीं निकल पा रही है। हरख ब्लाक के दौलतपुर, टेसुवा, सतावां, खुशहाल पुर, बबुरिहा, मिर्जापुर, दादरा आदि गांवों में टमाटर की खेती किसान करते हैं। रबी सीजन यानि जाड़े की फसल पहले तो ठीक-ठाक दाम में बिकी। लेकिन मार्च माह में गर्मी ज्यादा पड़ने से खेतों में फसल जल्दी पक गई।
इससे बाजार में मांग के सापेक्ष टमाटर ज्यादा पहुंचने लगा। जिले के किसान जायद में भी टमाटर की खेती करते हैं, जिसमें फसल अप्रैल से मई-जून तक रहती है जायद की अगेती फसल उगाने वाले किसानों को भी काफी नुकसान हो रहा है। जिस एक बीघा खेत में किसान को पिछले साल 60 हजार रूपये की आमदनी की थी उस खेत में छह हजार का भी मुनाफा नहीं हो पा रहा है।
दौलतपुर के किसान राम मिलन ने बताया कि उन्होंने एक बीघा फसल खेत में जोतकर मेंथा की रोपाई कर दी, क्योंकि 40 से 60 रुपये कैरेट टमाटर बिकता है। एक कैरेट में 25 किलो टमाटर आता है। औसत दो रुपये किलो का पड़ता है। एक कैरेट टमाटर तोड़ कर वाहन में लादते तक 35 रुपये का खर्चा आता है। इसलिए टमाटर तोड़ने का कोई फायदा नहीं दिखाई पड़ रहा है।
राम मिलन के खेत के बगल में बाबू के एक बीघा खेत में भी टमाटर लदे दिख रहे हैं। पर उन्होंने भी इसे तोड़ा नहीं है। बताया कि इसी एक बीघा खेत में पिछले वर्ष 60 हजार रुपये का मुनाफा हुआ था। इस बार अभी तक कुल आठ हजार रुपये का टमाटर ही बिका है।
मौसम ने बिगाड़ा संतुलन
टमाटर की बड़े पैमाने पर खेती करने वाले दौलतपुर गांव के ही किसान पद्मश्री राम सरन वर्मा ने बताया कि मौसम ने टमाटर का हाल बेहाल कर दिया है। इस बार जाड़े वाली टमाटर की फसल फरवरी माह में ही गर्मी बढ़ने से पक गई। इसलिए बाजार में भाव नहीं मिल रहा। अप्रैल-मई में टूटने वाली जायद की टमाटर की फसल भी ज्यादा मुनाफा देने वाली नहीं होगी।