मेंथा फसल की बर्बादी देख शनिवार को एक किसान की सदमे में जान चली गई। परिवार के मुखिया की मौत की जानकारी मिलते ही परिवारीजनों में कोहाराम मच गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने मार्ग जामकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। एसडीएम सदर ने नाराज ग्रामीणों को समझाकर शांत कराया। वहीं परिवारीजनों का आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति ने रंजिश में नहर काट दी जिससे मेंथा की फसल बर्बाद हुई है।
जहांगीराबाद थानाक्षेत्र के ग्राम फतेहसरायं निवासी बद्री प्रसाद (60) की पांच बीघा मेंथा की फसल जलभराव से बर्बाद हो गई। किसान बद्रीप्रसाद इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सके और उनकी मौत हो गई। उनके पौत्र कुलदीप ने बताया कि खेत गया तो देखा कि मेड़ के किनारे बाबा का शव पड़ा है जिसकी सूचना उसने परिवारीजनों को दी।
परिवारीजनों का कहना है कि बद्री की मौत फसल बर्बाद होने के कारण सदमे से हुई है। जिसकी सूचना तहसील प्रशासन को दी गई। अधिकारियों के तत्काल मौके पर न पहुंचने से आक्रोशित ग्रामीणों ने शहावपुर-जहांगीराबाद मार्ग जाम कर दिया।
दो घंटे बाद एसडीएम नीलम यादव, तहसीलदार उमेश सिंह, लेखपाल जितेंद्र श्रीवास्तव आदि मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने पीड़ित परिवार व गांव वालों को समझाकर शांत कराया। साथ ही लेखपाल को मृत किसान के फसल नुकसानी के आंकलन का आदेश देते हुए कृषक बीमा योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया है।
बद्री प्रसाद के पौत्र कुलदीप ने बताया कि उसके बाबा के नाम शहावपुर आर्यावर्त ग्रामीण बैंक में केसीसी कार्ड पर 70 हजार रुपये का कर्ज भी है जिसे वह अभी तक चुका नहीं पाए थे।
फतेहसरांय गांव में पिपरौली माइनर बीते 2 मई को पंकज के खेत के पास कट गई थी जिससे कई िकसानों की करीब 400 बीघा मेंथा की फसल जलमग्न हो गई थी। बद्री प्रसाद के पौत्र संदीप ने जहांगीराबाद थाने में गांव के ही गजोधर व पूर्णमासी के खिलाफ नहर काटने की तहरीर दी थी। जिस पर थानाध्यक्ष वकील सिंह यादव ने दोनों पक्षों पर शांति भंग की धाराओं में चालान कर दिया था।
किसान की मौत की जानकारी मिलने के बाद तहसीलदार सदर के साथ मौके पर जाकर जांच पड़ताल की गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। फसल नुकसानी का आंकलन करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री कोष से राहत दिलाने के लिए भी पत्र लिखा जा रहा है। - नीलम यादव, एसडीएम सदर