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किसान की मौत के बाद गांव में तनाव, पुलिस और पीएसी तैनात

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बाराबंकी। कर्ज में डूबे किसान की मौत की सूचना के बाद गांव और पोस्टमार्टम हाउस में तनाव और गुस्से का माहौल दिखा। देररात तक मांगें न माने जाने से परिवारीजन और उनके समर्थकों के साथ किसान धरना दे रहे थे। एसडीएम सदर व सीओ समेत कई अधिकारी वार्ता कर मामले का हल कराने का प्रयास करने में जुटे रहे। वहीं सांसद, पूर्व सांसद, विधायक आदि ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर परिवारीजनों का हाल लिया और फिर निकल गए।
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उधर गांव में भी तनाव को देखते हुए पुलिस, पीएसी और दमकल की गाड़ियां कर्मचारियों के साथ मुस्तैद रहीं। परिवारीजन और किसान आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए थे। तनाव को देखते हुए पोस्टमार्टम हाउस पर भी भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
सिद्धौर क्षेत्र के मवैया मजरे सादुल्लापुर निवासी किसान जगजीवन वर्मा (55) पर तीन बैंकों का करीब 40 लाख रुपये का कर्ज था। उसकी वसूली के लिए नायब तहसीलदार हैदरगढ़ अभिषेक यादव के नेतृत्व में राजस्व टीम गुरुवार को वसूली के लिए गांव गई थी। आरोप है कि टीम किसान को अपने साथ लेकर जा रही थी कि इसी बीच किसान ने कोई पदार्थ खा लिया। किसान ने टीम को बताया कि उसने जहर खा लिया है। यह सुन टीम के हाथ-पांव फूल गए और उसे आनन-फानन में सीएचसी पहुंचाया गया, वहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था जहां शुक्रवार देरशाम किसान की मौत हो गई।
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सूचना मिलते ही शनिवार को सुबह से ही पोस्टमार्टम हाउस में किसान जुटने लगे। किसानों की भीड़ बढ़ती देख प्रशासन भी सतर्क हो गया और भारी संख्या में पुलिस बल पोस्टमार्टम हाउस पर तैनात कर किसान का पोस्टमार्टम कराया गया लेकिन परिवारीजन शव लेने को तैयार नहीं हुए। जानकारी पर एसडीएम सदर अभय कुमार पांडेय, सीओ सुशील कुमार सिंह, राजेश यादव मौके पर पहुंचे और किसानों तथा परिवारीजनों से वार्ता करने लगे लेकिन परिवारीजन और किसान आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए थे।
अधिकारियों से जब वार्ता में बात नहीं बनी तो वे लोग पोस्टमार्टम हाउस में ही धरने पर बैठ गए। इसी बीच सूचना मिलते ही भाजपा सांसद उपेंद्र सिंह रावत, सदर विधायक सुरेश यादव, पूर्व सांसद रामसागर रावत, कांग्रेसी नेता तनुज पुनिया अपने समर्थकों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए और परिवारीजनों का हाल जाना। भाजपा सांसद ने यथा संभव मदद का आश्वासन दिया लेकिन धरना दे रहे किसान कार्रवाई से नीचे पर तैयार नहीं थे।
जिलाधिकारी द्वारा जारी प्रेस नोट में लिखा है कि किसान जगजीवन ने इंडियन बैंक सतरही से 10 लाख, 19 हजार 556 रुपया, केनरा बैंक जैदपुर से 20 लाख 92 हजार रुपया और कारपोरेशन बैंक शाखा बाराबंकी से करीब 18 लाख 14 हजार रुपये का कर्ज ले रखा था। इस प्रकार किसान पर कुल 49 लाख 25 हजार 556 रुपये का कर्ज मय ब्याज के था। जब किसान को बुलाकर बकाया जमा करने के लिए कहा गया था तो उसने अपनी जेब में रखी तंबाकू की पुड़िया से निकाल कर कोई संदिग्ध पदार्थ खा लिया और किसी से फोन कर कहा कि मैने जहर खा लिया है।
नायब तहसीलदार अभिषेक ने जब यह बात सुनी तो वह उसे सीएचसी कोठी ले गए जहां चिकित्सीय परीक्षण के बाद जिला अस्पताल भेज दिया गया। लेकिन परिवारीजन उसे इलाज के लिए लखनऊ ले गए जहां विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराया। 28 फरवरी को वापस लाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहां करीब साढ़े आठ बजे उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों की टीम से शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। मृतक किसान के पास करीब चार हेक्टेयर भूमि तथा आर्थिक स्थिति संतोषजनक है। उसके घर पर ट्रैक्टर, बाइक आदि वाहन तथा पक्का मकान भी है।
बैंक कर्जदार किसान जगजीवन परिवार का अकेला कमाने वाला था। उसके ऊपर सात पुत्रों लवलेश, चंद्रेश, बृजेश, अखिलेश, अजेश, दिलेश व रवि समेत दो पुत्रवधू बीना और विमला की जिम्मेदारी थी। वहीं एक पुत्री आरती की शादी हो चुकी है।
शुक्रवार की शाम जिला अस्पताल में मौत की खबर पहुंचते ही पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। मृतक की पत्नी आशा देवी का रो-रोकर बुरा हाल था और वह बार-बार बेहोश हो जा रही थी। उसके मुंह से बार-बार यही निकल रहा था कि तहसील वालों ने हमारे आदमी को मार डाला।
किसान की मौत की सूचना और मांगों को लेकर किसानों द्वारा पोस्टमार्टम हाउस में दिए जा रहे धरने की जानकारी मिलते ही भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिनाम सिंह भी आधी रात पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। इस दौरान उन्होंने एसडीएम सदर अभय पांडेय, एसडीएम फतेहपुर पंकज सिंह, सीओ सुशील कुमार, राजेश यादव आदि मौके पर मौजूद अधिकारियों से वार्ता की। प्रदेश उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को बताया कि किसानों को शासन द्वारा जो आर्थिक मदद दी जाती है वह तत्काल दी जाए, किसान द्वारा जो कर्ज लिया गया है, उसे माफ किया जाए और आरोपी अधिकारियों के खिलाफ न्यायिक जांच कराई जाए।
यदि वह दोषी पाए जाते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाए। इस पर एसडीएम हैदरगढ़ योगेंद्र कुमार द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद किसानों ने आधी रात बाद धरना समाप्त कर दिया। एसडीएम सदर ने बताया कि किसानों से वार्ता के बाद उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है जिस पर किसानों ने धरना समाप्त कर दिया है। इस मौके पर भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष राम किशोर पटेल, अनिल वर्मा, अनुपम वर्मा, सतीश वर्मा, रामबरन, विक्रांत सैनी व मो. इस्माइल आदि मौजूद रहे।
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