बाराबंकी में शुक्रवार को मोहरवा गांव में लगा ट्रांसफार्मर।
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मर्ज बढ़ता ही गया ज्यों-ज्यों दवा की। जिले की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था का हाल भी कुछ ऐसा ही है। संसाधन के सापेक्ष उपभोक्ताओं की संख्या और आपूर्ति का दबाव कई गुना हो गया। विद्युत कटौती के बाद भी स्थानीय खराबियां आपूर्ति पर हावी हैं तो ग्रामीण अंचलों में रोस्टर पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। अप्रैल के 15 दिन में अब तक जिले में पांच ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं जिनमें से एक बदला गया है।
गर्मी हो या सर्दी जिले में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था कभी पटरी पर ही नहीं आ सकी है। जहां तक गर्मी की बात है तो आम आदमी के हिस्से में परेशानी ही आती है। विद्युत तार बदलने जाने, ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाए जाने के बाद भी विद्युत आपूर्ति में कोई सुधार नहीं हुआ।
निर्बाध आपूर्ति के प्रति पॉवर कॉर्पोरेशन के अधिकारी व कर्मचारी भी संजीदा नहीं हैं। कहीं रोस्टर के वक्त बिजली गुल हो जाती है तो कभी ट्रिपिंग से दिक्कत खड़ी हो जाती है। कहीं हफ्तों से ट्रांसफार्मर फुंका पड़ा है तो कहीं तार बदले जाने के कारण बाधित है।
विद्युत आपूर्ति पॉवर कॉर्पोरेशन की बदहाली बयां कर रहा है। यह हालात तब हैं जब जिले में सभी विधायक सत्तारूढ़ दल के हैं और उनमें तीन तो राज्यमंत्री हैं।
हैदरगढ़ सबस्टेशन पर पांच एमवीए के तीन तथा एक एमवीए का एक ट्रंासफार्मर है। इसके अलावा 400 केवीए के 11, 250 केवीए के 35, 160 केवीए के 5, 100 केवीए के 30, 63 केवीए के 53, 25 केवीए के 102, 16 केवीए के 122 तथा 10 केवीए के 140 ट्रांसफार्मर हैं।
तैंतीस हजार वोल्ट विद्युत लाइन के तार बदले जाने के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित रहती है। रनापुर व रामापुर में लगा 25 केवीए का ट्रांसफार्मर बीते एक सप्ताह से फुंका पड़ा है। शिकायत के बाद भी बदला नहीं गया।