गजल के मुरीदों के लिए इससे बेहतर मौका शायद कोई नहीं था। मशहूर गजल गायक कमाल खान के फन व सुरों को सुनने के लिए इस कदर मजमा लगा कि आडिटोरियम भी छोटा पड़ गया। कमाल खान ने मंच संभाला तो तालियों की गड़गड़ाहट और वाह वाह का दौर देर तक चलता रहा।
देवा महोत्सव के सांस्कृतिक पांडाल में शुक्रवार शाम कमाल खान ने मशहूर गजल गायक स्व. जगजीत सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी प्रसिद्ध गजल चिट्ठी न कोई संदेश जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए.. सुनाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। एक के बाद एक गजल व सुरों की जुगलबंदी से वह मजमे पर छा गए।
सांस्कृतिक पांडाल मेें मशहूर गजल गायक कमाल खान के फन व सुरों को सुनने लोगों की काफी भीड़ जुटी रही। मुझको यकीं सच कहती थी जो भी अम्मी कहती थी... गजल को खूब दाद मिली। होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है.. सुन श्रोता झूम उठे। वक्ता की नजाकत भांप कर कमाल खान ने उमराव जान की प्रसिद्ध गजल- जिंदगी जब भी तेरी बज्म में लाती है हमें, ये जमीं चांद से बेहतर नजर आती है.. सुनाया तो पांडाल तालियों से गूंज उठा।
एक से बढ़कर एक गजलों की ऐसी झड़ी लगी कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है.. गजल ने लोगों को साथ-साथ गुनगुनाने पर मजबूर कर दिया। दुबई, कतर, बहरीन, बैंकाक में अपनी गजलों से धूम मचा चुके कमाल खान ने एक के बाद एक गजल सुनाकर लोगों का दिल जीत लिया।